आजमगढ़। सिधारी स्थित मंडलायुक्त सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मंडलायुक्त एसवीएस रंगाराव ने जनपद के एसडीएम और तहसीलदारों के साथ समीक्षा की। जिसमें उन्होंने कहा कि सांसदों, विधायकों, जन प्रतिनिधियों, आम जन से आईजीआरएस, समाधान दिवस, थाना दिवस, जन सुनवाई आदि के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का समयवद्ध, गुणवत्तायुक्त एवं स्थायी निस्तारण किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
एंटी भू-माफिया टास्कफोर्स के तहत की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर अवैध रूप से अतिक्रमण करने वालों को पहले जमीन खाली करने के लिए कहें, यदि इसके बावजूद अतिक्रमणकर्ता द्वारा जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटाया जाता है तो उसके विरुद्ध गुंडा एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराएं। आवश्यकतानुसार जिला बदर की भी कार्रवाई की जाए। सार्वजनिक भूमि और निजी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने के कारण प्राय: कानून व्यवस्था एवं शांति व्यवस्था प्रभावित होती है, इसलिए इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने समस्त उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि शांति समिति की बैठकों के लिए त्योहारों आदि का इंतजार किया जाना उचित नहीं है, बल्कि अपने-अपने सब-डिवीजन में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र के हर समुदाय के गणमान्य लोगों के साथ महीने में कम से दो बार थानावार शांति समिति की बैठकें की जाएं।
उन्होंने तहसील न्यायालयों में अविवादित वरासत के पुराने मामलों के शत प्रतिशत निस्तारण के लिए 15 अगस्त तक की समय सीमा निर्धारित करते हुए आगाह किया कि निर्धारित अवधि के बाद 122बी के पुरानी मामले लंबित नहीं मिलने चाहिए। श्रावस्ती माडल के तहत भूमि विवाद के निस्तारण के लिए जो भी टीमें गांवों में जा रही हैं उसमें शामिल राजस्व विभाग के कर्मी धारा-122बी, 145 एवं 133 की सूची के साथ ले जाए और मौके पर जॉंच कर तत्काल उसका निस्तारण करें। वरासत, मेड़बंदी, भूमिधरी आदि के मामलों में एक ही प्रकरण में दो प्रकार की रिपोर्ट प्राप्त हुई है जिसके कारण विवाद में और पेचीदगी पैदा हो जाती है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लें और संबंधित लेखपाल एवं राजस्व निरीक्षक की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई करें। आपदा प्रबंधन की समीक्षा के दौरान कहा कि यदि कोई व्यक्ति या परिवार आपदा से प्रभावित होता है तो उसको तुरंत राहत पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। एसडीएम और तहसीलदार आपदा प्रभावित के यहॉं तुरंत जाएं और पीड़ित को उसी दिन राहत सामग्री उपलब्ध कराएं। कभी कभी इस प्रकार की भी शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि लाइसेंसी शस्त्र को लाइसेंसी द्वारा शस्त्र की दुकान में जमा होना बताया जाता है लेकिन वास्तविक रूप से ऐसा नहीं होता है। उन्होंने सभी एसडीएम को निर्देश दिया कि क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी के साथ शस्त्र की दुकानों और थानों में जमा शस्त्र की सूची के साथ जाएं और जमा असलहों को देखें। लाइसेंसी शस्त्र की दुकानों से लाइसेंस धारकों द्वारा खरीदे गए कारतूस, बुलेट का पूरा लेखा जोखा चेक करें और लाइसेंस धारकों से उसके उपयोग आदि का पूरा विवरण लें।