लाटघाट। महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार कई योजनाओं का संचालन कर रही है। इसके बाद भी जिले में पीड़ित-विक्षिप्त मिली महिलाओं के आश्रय के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। फिलहाल उन्हें जोकहरा स्थित रामानंद सरस्वती पुस्तकालय में रखा जाता है।
जिले में अक्सर ही पीड़ित-विक्षिप्त लड़कियां और महिलाएं सड़क पर घूमती मिलती हैं। जिनके सुरक्षित आश्रय के लिए कोई केंद्र नहीं है। कहने को तो आशा ज्योति केंद्र जिले में कार्य कर रही है, लेकिन इसके बाद भी अपना कोई परिसर इन महिलाओं/लड़कियों को सुरक्षित रखने के लिए नहीं है। प्रोबेशन विभाग को आशा ज्योति केंद्र के निर्माण के लिए कमिश्नरी के पास में आवश्यक जमीन मिल चुकी है। पर केंद्र बनाने के लिए प्रस्ताव शासन में अटका पड़ा है। जिला प्रोवेशन अधिकारी कार्यालय के अंर्तगत संचालित इस केंद्र द्वारा भी विक्षिप्त/पीड़ित लड़कियों को जिला मुख्यालय से चालीस किमी दूरी पर स्थित रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा में रखा रखा जाता है। पुस्तकालय की डायरेक्टर हिना देसाई ने बताया कि अब तक पांच सौ से अधिक ऐसी महिलाओं/लड़कियों को शरण दिया जा चुका है। युवतियों के परिजनों की तलाश कर उनके हवाले कर दिया जाता है।