आजमगढ़। 11 बुनकर समितियों के कूट रचना कर मार्केटिंग इंसेंटिव के 1.40 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा होने के बाद जिले में संचालित लगभग 275 बुनकर समितियों की फाइलों को जांच टीम ने हथकरघा विभाग से तलब कर लिया है। इन फाइलों को फिलहाल ट्रेजरी में रखा जाएगा और वहीं से मंगाकर इसकी जांच की जाएगी। सूत्रों की माने के इनमें से लगभग 125 समितियों की ओर से 2010-11 और 2011-12 में दो बार मार्केटिंग इंसेंटिव लिया गया है। वहीं 50 ने सिर्फ 2010-11 और लगभग 100 ने सिर्फ 2011-12 में मार्केटिंग इंसेंटिव पाया है। कुछ समितियों के हाथों में तीस लाख तो कुछ के हाथ में 10 लाख गए हैं। अब जांच के बाद ही पता चलेगा कि इस धन का सदुपयोग हुआ है या दुरुपयोग।
डायरेक्टर हथकरघा विभाग रमा रमण के निर्देश पर पिछले दिनों हुई एक शिकायत की जांच में मुबारकपुर की 11 बुनकर समितियों के कूट रचना कर मार्केटिंग इंसेंटिव के 1.40 करोड़ रुपये के गबन करने का खुलासा हुआ था। जांच टीम ने ऐसे ही फर्जीवाड़ा होने की बात कही थी। इस पर जिलाधिकारी ने चार सदस्यीय टीम का गठन कर जनपद की सभी समितियों की जांच करने के आदेश दिए थे। टीम ने जांच के लिए हथकरघा विभाग के मऊ स्थित कार्यालय से लगभग 275 समितियों की फाइल को तलब कर लिया है। एडीआई हथकरघा को फाइले ट्रेजरी में रखवाने को कहा गया है। वहीं से फाइलों की मंगाकर इसकी जांच की जाएगी। 275 समितियों में लगभग 125 समितियों की ओर से 2010-11 और 2011-12 में दो बार मार्केटिंग इंसेंटिव लिया गया है।
यूपी एपेक्स रेशमी एवं कॉटन, सिल्क बुनकर सोसाइटी, अंसार हैंडलूम, हथकरघा औद्योगिक उत्पादन, किंग हथकरघा आदि ऐसी कई सोसाइटियां हैं जिन्होंने 15 से लेकर 30 लाख रुपये तक मार्केटिंग इंसेंटिव बुनकरों के उत्थान के लिए लिया है। इसमें यूपी एपेक्स रेशमी एवं कॉटन आदि ने दो-दो बार अनुदान लिया है। वहीं 50 सोसाइटियों ने सिर्फ 2010-11 और लगभग 100 ने सिर्फ 2011-12 में मार्केटिंग इंसेंटिव पाया है। औसतन देखा जाए तो प्रति समिति के खाते में 12 लाख का अनुदान गया है। अब जांच के बाद ही पता चलेगा कि स मितियों की ओर से इस धन का सदुपयोग किया गया है, या 11 बुनकर सोसाइटियों की तरह दुरुपयोग। फिलहाल जांच शुरू होने से इन समितियों में हड़कंप की स्थिति मची है। सभी बचने का विकल्प ढूंढने में जुटे हुए हैं, लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिल रही है।