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डीएवी और मारूती इंटर कालेज के प्राइमरी अनुभाग में हुई नियुक्तियों की जांच करेगा पैनल

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आजमगढ़। डीएवी और मारूती विद्यालय इंटर कॉलेज के प्राइमरी अनुभाग में सहायक अध्यापकों की हुई नियुक्तियां शक के दायरे में आ गई हैं। मंडलीय और जनपदीय समिति के अनुमोदन के बाद शिक्षकों के वेतन जारी करने के आदेश भी जारी कर दिए गए थे। लेकिन नियुक्ति में धांधली का आरोप लगने पर डीआईओएस ने वेतन जारी करने के अपने आदेश को वापस लेते हुए जिलाधिकारी से इन नियुक्तियों की जांच की मांग कर दी। डीएम ने मामले में चार अधिकारियों का पैनल गठित कर जांच का आदेश दिया है।
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डीएवी इंटर कॉलेज के प्राइमरी अनुभाग में सहायक अध्यापकों कृष्ण प्रताप सिंह पुत्र कृपाशंकर सिंह, सतीश पुत्र रामानंद की नियुक्ति की गई थी। संयुक्त शिक्षा निदेशक ने 14 दिसंबर 2017 को पत्र जारी कर इन नियुक्तियों के मंडलीय समिति के अनुमोदन करने की बात कही थी। 26 दिसंबर को डीआईओएस ने भी प्रबंधक को वास्तविक कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से वेतन जारी करने का आदेश जारी कर दिया था। इस बीच नियुक्तियों में धांधली का बातें सामने आने लगी। इस मामले डीआईओएस से भी शिकायत की गई। इसपर डीआईओएस ने वेतन जारी करने के अपने आदेश को 17 जनवरी को वापस ले लिया। इस बीच कमिश्नर के रविंद्र नायक तक शिकायत पहुंचने पर दो फरवरी को कमिश्नर ने डीआईओएस को मामले का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस बाद डीआईओएस ने अपनी आख्या संयुक्त शिक्षा निदेशक को भेजकर पूरी पत्रावली उपलब्ध कराने का अनुरोध भी कर चुके हैं।
इसके साथ ही संयुक्त शिक्षा निदेशक की ओर से 30 दिसंबर 2016 को जारी आदेश के अनुसार मारूति विद्यालय इंटर कालेज एदिलपुर में सहायक अध्यापक पद पर अंग्रेज कुमार, संयज कुमार यादव, दीपा रानी हुई नियुक्ति की शिकायत मिली है। जिलाधिकारी ने इन नियुक्तियों की जांच के लिए एडीएम एफआर, एडीएसटीओ सुनील सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकस सिंह, डीआईओएस का पैनल गठित किया है।
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शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने की थी शिकायत
आजमगढ़। डीएवी इंटर कॉलेज के प्राइमरी अनुभाग में दो शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध तरीके से करने की शिकायत जिलाधिकारी और डीआईओएस दोनों से की गई थी। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामजन्म सिंह ने आरोप लगाया था शिक्षा माफियाओं के दबाव में ये नियुक्तियां जेडी की ओर से की गई हैं, शासन या विभाग की ओर से पद का सृजन ही नहीं था। यहां पहले से तैनात शिक्षक रिटायर होते गए, लेकिन पद सृजन न होने से नियुक्ति नहीं हो पा रही थी। ये भी आरोप लगाया था कि तत्कालीन अधिकारियों ने प्रबंधक को अपने पद से हटा दिया था। बेटी के नियुक्ति का लालच देकर किसी को प्रबंधक बनाया गया था, लेकिन टीईटी नहीं होने से उसकी नियुक्ति नहीं हो पाई। अधिकारियों के तबादले के बाध नये डीआईओएस से इसकी शिकायत पर जांच के आदेश हुए थे, लेकिन इसे दबा दिया गया। नियुक्ति के समय विज्ञापन के आधार पर साक्षात्कार नहीं होने का भी आरोप लगाया गया था। प्रधानार्य नियुक्ति से पहले ही रिटायर हो चुके थे। इसके साथ ही अनुमोदन से पहले ही दोनों शिक्षकों की टीईटी प्रमाण-पत्र की वैधता भी खत्म हो गई थी। क्योंकि ये पांच साल के लिए ही मान्य होता है।


अधिकारियों के करीबियों की नियुक्ति का आरोप़
आजमगढ़। शिकायतकर्ता ने तत्कालीन अधिकारियों पर अपने संबंधी एवं करीबियों की नियुक्ति करने का भी आरोप लगाया गया है। शिक्षक नेता राजमजन्म सिंह ने बताया कि निष्पक्ष जांच होने के बाद पूरे मामले की पोल खुल जाएगा। नियुक्तियां जेडी कार्यालय से होने के कारण इन दिनों जेडी और डीआईओएस कार्यालय में ठनी हुई है।
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