आजमगढ़। राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीव ब्यूरो मऊ की ओर से रबी कृषक प्रशिक्षण गोष्ठी का आयोजन बुधवार को कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से सेमा गांव में किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के कृषि सहयोगी कार्यक्रम मेरा गांव-मेरा गौरव के अंतर्गत निदेशक डॉ. अनिल कुमार सक्सेना ने बताया कि सूक्ष्म जीव आधारित कृषि पद्धितियों पर आधारित फसल उत्पादन की प्रक्रिया समय की मांग है। ब्यूरो ने इस मांग की पूर्ती के लिए कई महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीवों के अनुकल्पों का विकास किया है। इनमें बायो-एनपीके, बायो-जिंक और बायो-फास आदि प्रमुख हैं। ये मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, जिंक आदि को संतुलित और लंबे समय तक उपलब्धता को बढ़ावा देते हैं। इससे लगभग 30 प्रतिशत तक रासायनिक खादों पर निर्भरता में कमी लाई जा सकती है। वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इस दौरान 25 किसानों को एक एकड़ में उपयोग के लिए गेहूं के बीज के साथ, बायो-एनपीके, जिंक और अन्य अनुकल्प नि:शुल्क वितरित किए गए। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रुद्र प्रताप सिंह ने किसानों को मिट्टी में पोषक तत्वों के महत्त्व और मिट्टी की जांच के विषय में जानकारी दी। गांव के ही पंकज सिंह के खेत में सीड ड्रिल के माध्यम से बुवाई भी करवाई गई।