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सात नवंबर 1917 को हुई थी समाजवादी क्रांति

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आजमगढ़। समाजवादी अक्तूबर क्रांति शताब्दी वर्ष समारोह आयोजन समिति के तत्वावधान में महान अक्तूबर क्रांति की शताब्दी वर्षगांठ पर मंगलवार को राहुल चिल्ड्रेन एकेडमी के सभागार में वर्तमान परिस्थितियों में महान अक्तूबर क्रांति की प्रासंगिकता विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।
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गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे सत्यदेव पाल और कन्हैया लाल आजाद ने कहा कि राजशाही व्यवस्था में प्रजा का शोषण चरम पर था। औद्योगिक क्रांति के बाद पूंजीपतियों के उत्पादन में इतना विकास हुआ कि उन्हें दूसरे राज्य में जाकर अपनी कम्पनियों का विस्तार करना पड़ा। आगे चलकर इन कम्पनियों का लूट और मुनाफा बढ़ता गया और साम्राजवाद के दौर में पहुंच गया। सोवियत रूस में इसी शोषण और लूट पर आधारित राजशाही, जराशाही और पूंजीशाही के विरुद्ध सात नवंबर 1917 को समाजवादी क्रांति हुई। इसके बाद मेहनतकशों की सत्ता कायम हुई। गोष्ठी में डा. रवींद्रनाथ राय, वशिष्ठ सिंह, डा. अमर नाथ द्विवेदी, दुखरन राम, सुबेदार यादव सहित अनेक वक्ता उपस्थित रहे।
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