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पुरुषों को भी निभानी होगी परिवार नियोजन की जिम्मेदारी

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अतरौलिया। मदरसा बसीरतुल उलूम में रविवार को ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान की ओर से गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें राजदेव चतुर्वेदी ने कहा कि आज भी हमारे समाज में दोयम दर्जे की सोच और व्यवहार प्रचलन में है। महिला और पुरुष के बीच, जबकि यह अनुचित है। भेदभाव रहित समाज और परिवार नियोजन की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की ही नहीं है। इसे पुरुष वर्ग को भी निभाना होगा, तभी सफलता मिलेगी। हमारे समाज में व्याप्त महिला हिंसा और भेदभाव के आंकड़े बताते हैं कि आज भी हमारी सोच पुरुषवादी बनकर रह गई है। उप्र के आंकड़े देखें तो 15 से 45 वर्ष उम्र की महिलाएं 38 फीसदी शारीरिक यौन हिंसा की शिकार हुई हैं। 2015 में साढ़े 35 हजार महिला हिंसा के केस पुलिस के पास दर्ज हैं। महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा पर रोक हो या शिक्षा अथवा स्वास्थ्य और परिवार नियोजन की बेहतरी बगैर पुरुषों की सहभागिता के संभव नहीं होगी। इसका रिमोट पुरुष वर्ग के ही पास है।
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