आजमगढ़। ढाई साल से परेशानी झेल रहे रोडवेज के अधिकारी, कर्मचारी और यात्रियों को जल्द ही समस्याओं से छुटकारा मिलने की उम्मीद है। एक हफ्ते बाद रोडवेज दफ्तर नए भवन में शिफ्ट हो जाएगा। इसके बाद पुराने भवन के ध्वस्तीकरण का कार्य आरंभ हो जाएगा। क्योंकि पुराना भवन पहले ही 11 लाख रुपये में नीलाम हो चुका है। माना जा रहा कि पुराना भवन का मलवा हट जाने के बाद बसों का संचालन एक निश्चित स्थान से होना शुरू हो जाएगा।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से सांसद चुने जाने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आजमगढ़ डिपो के पुराने भवन को तोड़ककर यहां अत्याधुनिक रोडवेज भवन बनाने का निर्देश दिया। करीब 16 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को चालू करने के लिए 12.30 करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिया गया। बजट मिलने के बाद कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने जून 2015 में निर्माण शुरू कर दिया। यह निर्माण दिसंबर 2016 तक पूरा करना था। लेकिन धनाभाव के चलते काम ठप हो गया। उधर रोडवेज परिसर में निर्माण शुरु होने से पूरा रोडवेज विभाग सड़क पर आ गया। इनके पास ना तो बसों के उचित स्थान से संचालन की व्यवस्था थी, ना ही अधिकारियों के सही ढंग से बैठने की व्यवस्था थी। तभी से सभी बसें सड़क पर लग रही हैं। अमर उजाला की ओर से समस्या उठाने पर जिले के प्रभारी मंत्री एवं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जल्द छुटकारा दिलाने का भरोसा दिया था। इससे पहले 31 मार्च को जनसुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने 1.80 करोड़ रुपये देकर निर्माण शुरू करा दिया। साथ ही शेष बजट को जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। शासन की पहल पर नए अत्याधुनिक रोडवेज भवन के निर्माण कार्य प्रगति पकड़ी और अब लगभग पूरा हो चुका है। थोड़ा बहुत जो कार्य नहीं हो पाया है। उसे युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा। उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर रोडवेज कार्यालय नए भवन में शिफ्ट हो जाएगा। दफ्तर शिफ्ट होने के बाद पुराना भवन तोड़ा जाएगा। जिसका मलवा 11 लाख रुपये में पहले ही नीलाम हो चुका है। मलवा हट जाने के बाद रोडवेज परिसर से बसों का संचालन शुरू हो जाएगा। - धर्मेंद्रनाथ यादव, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज
दूकानदारों के भी बहुर जाएंगे दिन
आजमगढ़ । रोडवेज भवन टूट जाने से पूरा महकमा सड़क पर आ गया। बसें इधर-उधर लगने लगी। ऐसे में जो यात्री रोडवेज के आसपास मौजूद दूकानों से सामान खरीदते थे। वे ग्राहक अब दूसरे दूकानों से सामान लेने लगे। ग्राहकों के न आने पर रोडवेज के आसपास के कई दूकानदार भूखमरी के शिकार हो रहे थे। दिन भर दूकान खोलकर बैठने पर शायद ही शाम तक थोड़ी बहुत इनकम हो पाती थी। ऐसे में रोडवेस परिसर से बसों का संचालन शुरू हो जाने से दूकानदारों के भी दिन वापस लौट आएंगे।