लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवारावासियों की मुसीबत बढ़ाने के लिए एक बार फिर घाघरा तबाही मचाने को आतुर दिख रही है। नदी के जलस्तर में विगत तीन दिनों से लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। मंगलवार को भी नदी के जलस्तर में बदरहुंआ गेज पर पांच सेमी और डिघिया गेज पर दो सेमी की बढ़ोत्तरी देखने को मिली। जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान में भी तेजी आ गई है। जिसके कारण देवारा खास राजा गांव के त्रिपुरारी का पुरवा के 19 घर कटान की जद में आ गए हैं। वहीं गांवों में बीमारियों ने भी पांव पसारने शुरू कर दिए हैं।
कई दिनों तक देवारावासियों को दहलाने के बाद खतरा बिंदू से नीचे आई घाघरा एक बार फिर खतरा बिंदू के करीब पहुंच चुकी है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान में भी आई तेजी ने ग्रामीणों की नींदे उड़ा रखी हैं। बाढ़ से प्रभावित लोग प्रशासन से मदद की आस लगाकर निराश हो रहे हैं। प्रशासन की तरफ से राहत कार्य जारी है लेकिन यह राहत ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। देवारा खास राजा गांव के मुराली के पुरवा निवासी रामचंदर, राम अवध, रामाधार, तीरथ, अयोध्या, परसन, पूजन, देवकी आदि 14 ऊलोगों का आशियाना घाघरा नदी में समा चुका है। तो वही बगहवाम के उत्तर त्रिपुरारी के पुरवा के 19 लोगों का घर कटान की जद में है। सोमवार को लगभग 35 बीघा जमीन घाघरा में विलीन हो गई। घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जलस्तर बढने से लोगों में भय व्याप्त हो गया है। सोमवार को शाम चार बजे बदरहुंआ गेज पर घाघरा का जलस्तर 71.60 और डिघिया गेज पर 70.70 मीटर दर्ज किया गया था। जो मंगलवार की शाम को बदरहुंआ गेज पर पांच सेमी बढ़कर 71.65 मीटर और डिघिया गेज पर दो सेमी बढ़कर 70.72 मीटर पर पहुंच गया। नदी बदरहुंआ गेज पर खतरा बिंदू 71.68 मीटर से तीन सेमी नीचे और डिघिया गेज पर खतरा बिंदू 70.40 मीटर से 32 सेमी ऊपर बह रही है। बाढ़ खंड के अधिकारियों की मानें तो शारदा बैराज से 20585, गिरिजा बैराज से 20585 और बनबसा बैराज से 39633 क्यूसेक पानी नदी में डिस्चार्ज हो रहा है। जिसके कारण नदी के जलस्त्र में वृद्घि देखने को मिल रही है।
प्रशासन द्वारा पीड़ितों को उपलब्ध कराई गई सहायता
लाटघाट। तहसीलदार सगड़ी पीके राय ने बताया कि बाढ़ आपदा राहत पैकेट 11465 परिवार में दिया गया। 100 विस्थापित लोगों को पालीथीन दी गई। 364 कुंतल पशु किसानों को भूसा दिया गया। 118 विस्थापितों के खाते में 38 सौ रुपया दिया गया और किसानों के फसल का सर्वे कराया जा रहा है उन्हें भी उचित मुआवजा दिया जाएगा।
विस्थापित बच्चों को दिया जा रहा एमडीएम का भोजन
लाटघा। घाघरा नदी की त्रासदी की मार झेलते हुए बंधे और स्कूल में विस्थापित लोग राहत के लिए तरस रहे हैं।
अजमतगढ़ ब्लॉक के दाम महुला और हरैया ब्लाक के शाहडीह गांव का रिंग बांध टूटने से सैकड़ों परिवार विस्थापित होने को मजबूर हो गए थे। दाम महुला के 14 परिवार स्कूल में विस्थापित हुए थे। जिसमें 12 परिवार घर वापस हो गए जबकि अभी भी दो परिवार प्राथमिक विद्यालय दाम महुला में शरण लिए हुए हैं। दाम महुला के विस्थापित नेबू लाल पुत्र तूफानी पांच सदस्यों के साथ, राम लखन पुत्र हरिहर सात सदस्यों के साथ स्कूल में शरण लिए हुए हैं। उन्होंने बताया कि एक एक पैकेट आपदा राहत का मिला था। उसके बाद से अभी तक हमें राहत के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है। छोटे-छोटे बच्चे भूख से भी तिलमिलाते रहते हैं। जब स्कूल चलता है तो बच्चों का एमडीएम के भोजन से काम चल जाता है लेकिन जब स्कूल बंद रहता है तो वह भी नहीं मिलता।
सेमरी गांव में नहीं बंटा आपदा पैकेट
लाटघाट। सगड़ी तहसील क्षेत्र का महराजगंज ब्लाक का सेमरी गांव 1308 आबादी का गांव है। सेमरी गांव की लोहरैया बस्ती के 40 घर घाघरा में विलीन हो चुके हैं। वहीं चंद्रहा के 19 घर घाघरा नदी में समा चुके हैं। कटान की जद में आने पर और घाघरा नदी के दोआबा में बसने वाले सेमरी गांव आज शाहपुर कटया गोरखपुर बंधे पर शरण लिए हुए हैं । इन परिवारों को अभी तक आपदा राहत का पैकेट नहीं मिला है। ग्राम प्रधान दशरथ निषाद का कहना है कि 25-25 किलो राशन सभी परिवार में पहले वितरित किया गया था। लेकिन आपदा राहत पैकेट किसी भी परिवार को अभी तक नहीं मिला है। लेखपाल चंद्रभूषण अभी तक नहीं पहुंचे और ना ही ब्लॉक व तहसील का कोई कर्मचारी और अधिकारी विस्थापितों का हाल जानने आया। तहसीलदार सगड़ी पीके राय ने कहा कि सेमरी गांव के प्रत्येक घर को आपदा राहत का पैकेट मिलेगा। अब तक क्यों नहीं मिला हम जांच करते हैं और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई करेंगे।