अतरौलिया। कस्बा के जायसवाल त्रिमुहानी पर स्थापित गणेश प्रतिमा का गाजे-बाजे के साथ विसर्जन किया गया। इस दौरान गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के साथ नगर गूंज उठा।
गणेश चतुर्थी के दिन से अतरौलिया बाजार में जायसवाल त्रिमुहानी में स्थापित श्रीगणेश प्रतिमा को चौथे दिन गाजे-बाजे केे साथ विसर्जित किया गया। विसर्जन से पूर्व भगवान श्रीगणेश को मोदक तथा लड्डू सहित छप्पन भोग का भोग लगाया गया। पूरे नगर में प्रसाद स्वरूप हलवा और लड्डू का वितरण किया गया। विसर्जन जुलूस में युवा भक्ति धुन और ढ़ोल-नगाड़ों की थाप पर अबीर गुलाल के संग झूमते नजर आए। विसर्जन जुलूस अतरौलिया बाजार जायसवाल त्रिमुहानी से निकलकर बब्बर चौक, दुर्गा चौक, बरन चौक, गोला क्षेत्र, मुसाफिर चौक, केसरी तिराहा होते हुए अगया स्थित छोटी सरयू के तट पर पहुंचा। जहां विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद लोगों ने श्रीगणेश जी को अगले बरस पुन: आने का आग्रह करते हुए विदाई दी। जिन रास्तों से गणेश जी की प्रतिमा गुजरी, वहां महिलाओं ने छत से पुष्प वर्षा की। इस मौके पर भानुदास पाटील, सुनील पाटिल, अमित कुमार जायसवाल, रिंकू सोनी, राजू स्वर्णकार, अनिल जायसवाल, अनिल मोदनवाल, भोला जायसवाल, विशाल जायसवाल आदि उपस्थित रहे।
माता पिता को प्रणाम ही हरि की वंदना
आजमगढ़। नगर के लाल डिग्गी स्थित श्री गणेश बड़ा मंदिर में गणेश उत्सव के तीसरे दिन श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भगवान गणेश का भव्य श्रृंगार किया गया।
कथावाचक पंडित गणेश परासर ने कहा कि माता-पिता को प्रणाम करना श्री हरि की वंदना है। प्राणी मात्र के कल्याण के लिए गुरु की शरण में जाकर समाजहित, राष्ट्रहित, स्वकल्याण की याचना करें। उन्होंने कहा कि गुरु प्रभु का ध्यान करते हुए भक्तों की रक्षा के लिए हरि से प्रार्थना करते है। अन्याय और पाप का अंत करने के लिए हरि पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। जैसे राजा दशरथ के घर श्री राम ने जन्म लिया और रावण के साम्राज्य का अंत किया। उन्होंने कहा कि संस्कार भारतीय सनातन धर्म की अमूल्य निधि है। कथा समापन के बाद लोगों को प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर मंहत राजेश मिश्रा, संतोष मिश्रा, नन्हे पंडित, गिरधारी सेठ, पतिराम सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।