आजमगढ़। कन्नौज इटावा नहीं अब आजमगढ़ मेरी पहचान है। संसद में जब भी बोलने का मौका मिलेगा तो लोग मुझे आजमगढ़ के सांसद के रूप में संबोधित करेंगे। अब हम आजमगढ़ी हो गए हैं। आगे जीत मिले या न मिले लेकिन यह रिश्ता अब कभी टूटने वाला नहीं है। ये बातें सपा मुखिया और आजमगढ़ सीट से नव निर्वाचित सांसद अखिलेश यादव ने सोमवार को आईटीआई मैदान पर आयोजित आभार जनसभा में कहीं।
उन्होंने कहा कि आजमगढ़ से रिश्ता नया नहीं है। मैंने अपनी असली राजनीति की शुरूआत ही यहां से की है। 2012 के चुनाव के पूर्व मुझे आजमगढ़ के लोगों ने बुलाया और मैंने यहां तीन दिनों तक रह कर लोगों से मिला। लोगों ने मुझे सिर आखों पर बैठाया और यहां की 9 सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को जीता कर विधान सभा में भेजा। मंच से अपने जीत का प्रमाण पत्र दिखाते हुए कहा कि 23 को चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद जब प्रमाण पत्र मुझे मिला तो मैंने घर पर इसे किसी को नहीं दिखाया। मैंने तय कर लिया था कि आजमगढ़ की जनता ने मुझे जिताया है और यह प्रमाण पत्र पहले आजमगढ़ की जनता को दिखाने के बाद ही किसी और को दिखाऊंगा। यह मेरी नहीं यहां की जनता की जीत है, यहां के कार्यकर्ताओं की जीत है। जिन्होंने हर तरह का दबाव झेलने के बाद भी हर बूथ पर मुझे जिताया। इस चुनाव में लड़ाई कुछ दूसरे प्रकार की थी, जिसे हम समझ नहीं पाए। क्योंकि ध्यान हटाने की ताकत हमारे पास नहीं है वह तो सिर्फ भाजपा के पास है। जिसमें वह सफल भी रही। उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों का आह्वान किया कि 2022 व 2024 के चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। बड़ा सपना देखें और उसे पूरा करने का संकल्प लें। जो सत्ता में है वो काम नहीं करेंगे और हमारे ही कामों पर वाहवाही लूटने का प्रयास करेंगे।
पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के बारे में कहा कि आज मैं इसी के ऊपर ही उड़ते हुए आया हूं। अगस्त 2020 तक इसे पूर्ण करने का दावा किया जा रहा है लेकिन अभी मात्र हवाई पट्टी के पास छोड़कर कहीं भी गिट्टी पड़ी नहीं दिखाई दी। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की डिजाइन हमने की है और जनता को हमें यह बताना होगा। बाबा योगी की सरकार इसे पूरा नहीं कर पाएगी। हमने डिजाइन की है, हम ही इसे पूरा करायेंगे। एक्सप्रेस वे बन जरूर रही है लेकिन वह लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे जैसी सुंदर नहीं बन रही। देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। 45 साल में जितनी बेरोजगारी नहीं थी उससे कहीं ज्यादा पांच साल में हो गई है। देश पर कर्ज 33 लाख करोड़ से बढ़ कर 70 लाख करोड़ हो गया है। 6 हजार सालाना पार कर कोई भी किसान खुशहाल नहीं हो सकता। किसानों में खुशहाली तभी आ सकती है जब उसे खाद, बीज, पानी के साथ ही मंडी की सहूलियत मिले। मौका मिला तो मैं आजमगढ़ के गांव में भी पहुंच कर जनता का आभार व्यक्त करूंगा।