आजमगढ़। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2018 रविवार को जिले में सकुशल संपन्न हुई । माध्यमिक शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन ने परीक्षा को नकल विहीन संपन्न कराने के लिए कड़े इंतजाम किए थे। शहर से लेकर ग्रामीणांचल तक परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। दिनभर शहर से लेकर ग्रामीणांचल की सड़कों पर जाम का झाम देखने को मिला। टीईटी 2018 परीक्षा के तहत सुबह की पाली में प्राथमिक स्तर व शाम की पाली में जूनियर स्तर की परीक्षा आयोजित थी। सुबह की पाली में 35 हजार 497 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। जिसके लिए कुल 71 केंद्र निर्धारित किए गए थे। शाम की पाली की परीक्षा के लिए 15812 परीक्षार्थियों के पंजीकरण कराया था, इसके लिए 32 केंद्र निर्धारित किए गए थे। सुबह की पाली की परीक्षा के लिए केंद्रों पर सुबह छह बजे से ही अभ्यर्थियों का पहुंचा शुरू हो गया था। सुबह की पाली 10 से 12.30 निर्धारित थी। परीक्षा शुरू होने के पूर्व केंद्रों पर कोषागार के डबल लॉक में रखे प्रश्रपत्र व उत्तर पुस्तिकाएं पहुंचाई गई। नकल विहीन परीक्षा संपन्न कराने को लेकर हर केंद्र पर छात्रों व केंद्र व्यवस्थापकों के बीच हंगामे की स्थिति भी देखने को मिली। गेट पर ही परीक्षार्थियों के आवेदन फार्म में लगाए गए आईडी और प्रशिक्षण योग्यता के ओरिजनल प्रमाण पत्र की चेकिंग की जा रही थी। दूसरी पाली की परीक्षा दिन में 2.30 से 5 बजे तक संपन्न कराई गई।
हर केंद्र पर तैनात थे पर्वेक्षक व स्टैटिक मजिस्ट्रेट
टीईटी परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने के लिए हर केंद्रों पर दो पर्यवेक्षकों के साथ ही एक स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी। इसके साथ ही 30 सचल दस्ते भी दोनों पालियों की परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों का चक्रमण करते नजर आए। इनके अलावा पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भी लगातार चक्रमण करते रहे।
मोबाइल क्या घड़ी भी ले जाने की नहीं थी अनुमति
शिक्षक पात्रता परीक्षा में इस बार सख्ती का आलम कुछ ज्यादा ही था। मोबाइल, कैलकुलेटर जैसे इलेक्ट्रानिक उपकरण तो पहले से ही परीक्षा केंद्र पर बैन है, लेकिन इस बार की परीक्षा में अभ्यर्थियों को घड़ी ले जाने की भी अनुमति नहीं थी। जिसके चलते अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान समय देखने में काफी परेशानी उठानी पड़ी।
कड़ी जांच-पड़ताल से परेशान रहे अभ्यर्थी
परीक्षा भवन में प्रवेश के अभ्यर्थियों को काफी कड़ी जांच-पड़ताल से होकर गुजरना पड़ा। मुख्य गेट पर ही प्रवेश पत्र के साथ आईडी व प्रशिक्षण योग्यता के ओरिजनल प्रमाण पत्र चेक किए जा रहे थे। वहीं कक्ष पर पहुंचने पर पुन: चेकिंग हो रही थी। इतना ही नहीं किसी तरह यदि कोई परीक्षार्थी घड़ी पहन कर अंदर प्रवेश भी कर गया तो उसकी घड़ी उतरवा कर जमा करा दिया गया।
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गणित व अंग्रेजी नेे किया परेशान, फिर भी पेपर रहा आसान
शिक्षक पात्रता परीक्षा की शुरूआत 2011 में हुई। शिक्षक की नियुक्ति के लिए इस परीक्षा को पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। 2011 से ही अभ्यर्थियों का यह मानना रहा है कि यह परीक्षा काफी कठिन होती है, लेकिन इस बार के प्रश्रपत्र को ज्यादातर अभ्यर्थियों ने आसान बताया। परीक्षार्थियों का कहना था कि गणित व अंग्रेजी के कुछ प्रश्रों ने जरूर परेशान किया लेकिन इसके बाद भी पेपर काफी आसान आया हुआ था।
सॉल्वर की तलाश में हाथ-पांव मारता रहा प्रशासन
जिला प्रशासन के पास से किसी माध्यम से यह सूचना आई हुई थी कि कुछ केंद्रों पर टीईटी परीक्षा को लेकर ठेका हुआ है। केंद्र व्यवस्थापकों द्वारा अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर सॉल्वर की व्यवस्था की गई है। इस सूचना पर जिला प्रशासन में हड़कंप की स्थिति देखने को मिली। सूत्र तो यह भी बताते है कि परीक्षा के एक दिन पूर्व शिक्षा विभाग व प्रशासनिक अमले की टीम ने पूरी रात विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण कर सॉल्वरों की तलाश करती रही। हालांकि माध्यमिक शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने इसकी कोई पुष्टि नहीं की।