आजमगढ़। उप्र हिंदी संस्थान लखनऊ और अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित डा. किशोरी लाल गुप्त जन्मशती के समापन अवसर पर मंगलवार को डीएवीपीजी कालेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवयित्री अर्चना सिंह सेंगर के काव्य संग्रह ‘मन के पंख’ का लोकार्पण मुख्य अतिथि विद्या विंदू सिंह द्वारा किया गया।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र में डा. रविंद्र गुप्त ने डा. किशोरी लाल गुप्त के साहित्य पर विस्तार से चर्चा की। डा. गीता सिंह, डा. प्रेम प्रकाश यादव और पूर्व मुख्य परिचालन अधिकारी भारतीय रेल रणविजय सिंह ने हास्य व्यंग में अंतर को परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि एक व्यंगकार समाज में व्याप्त न्यूनताओं को दूर करने का कार्य करता है। लेकिन हास्य में ऐसा नहीं है। अध्यक्षता करते हुए डा. सदानंद प्रसाद गुप्त ने कहा कि हम सब सौभाग्यशाली हें कि जो श्री गुप्त जी को जानने का प्रयास कर रहे हैं और उनके साहित्य पर व्याप्त व्याख्यान हमको सुनने का अवसर मिल रहा है। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष डा. श्रीनाथ सहाय ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन प्रभु नारायण पांडेय प्रेमी ने किया। वहीं द्वितीय सत्र का विषय रहा ‘विवेकी राय के साहित्य में ग्राम चेतना’। जिसकी अध्यक्षता जगदीश प्रसाद बर्नवाल कुंद ने की। मुख्य अतिथि डा. राजेश सिंह रहे। वक्ताओं में डा. विद्या विंदु सिंह, डा. कन्हैया सिंह और डा. विनम्र सेन शामिल रहे। इस मौके पर इंजीनियर रामनयन शर्मा, डा. डीडी सिंह, डा. अखिलेश सिंह, डा. परम प्रताप सिंह, डा. जगदंबा दुबे, जनमेजय पाठक आदि उपस्थित थे।