राजमार्ग 233 के फोरलेन निर्माण के लिए तीसरे प्रकाशन के बाद भी किसानों की जमीन बैनामा कराने का मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ऐसे मामलों में अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। ऐसे में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे (सिक्स लेन) परियोजना के लिए जिले के जिन चार तहसीलों के 151 गांव प्रभावित हो रहे हैं, वहां के किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई हैं। उनके भूखंडों को प्रतिबंधित करते हुए डीएम ने तहसीलों के सब रजिस्टार को पत्र भेजा है ताकि भूखंडों का बैनामा न हो सके।
बता दें कि राजमार्ग 233 (वाराणसी से लुंबनी) को फोरलेन बनाने के लिए अधिगृहीत किसानों के नाम का तीसरा और अंतिम प्रकाशन 17 दिसंबर 2013 को किया गया था। इसके बाद किसानों की जमीन का बैनामा कराने का मामला सामने आया। जांच में खुलास होने पर प्रशासन ने 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराए गए थे। डीएम ने अंतिम प्रकाशन के बाद खरीदी गई जमीनों का बैनामा निरस्त करने का निर्देश भी दे दिया।
अब राज्य सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे (सिक्स लेन) लखनऊ से भरौली (बलिया) तक बनाया जाना है। इसके निर्माण में किसानों के साथ किसी प्रकार की धांधली न होने पाए, इसके लिए प्रशासन सतर्क है। इसके तहत डीएम ने चार तहसीलों के सब रजिस्टार को पत्र भेजा है, ताकि किसी भी दशा में चिह्नित जमीनों का बैनामा न हो सके। सिक्स लेन की सड़क जिले में करीब 98 किलोमीटर तक जाएगी।
इसके लिए, आजमगढ़ के चार तहसीलों के 151 गांव के किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई है। इसमें सदर तहसील क्षेत्र के 61 गांव, निजामाबाद के 31, फूलपुर के 36 और सगड़ी तहसील के 23 गांव के किसान शामिल हैं। इन किसानों को 19 मार्च 2015 को जारी शासनादेश के तहत मुआवजा देने का प्रावधान है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई पहल नहीं शुरू हो सकी है लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही इसकी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
योजना के तहत यह सड़क लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, फैजाबाद, अंबेडकर नगर, आजमगढ़ होते हुए मऊ, बलिया, गाजीपुर होते हुए भरौली तक जाएगी। सड़क निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) को नियुक्त किया गया है।