आजमगढ़। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच लोग अपने मरीजों को लेकर बेड और आक्सीजन की तलाश में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटक रहे हैं। लोगों की मजबूरी का जमकर फायदा एंबुलेंस संचालकों द्वारा उठाया जा रहा है। जिला अस्पताल से वेदांता अस्तपाल की दूरी मात्र 1500 मीटर से अधिक नहीं है। एंबुलेंस संचालक द्वारा इस दूरी का एक मरीज से 1500 रुपये वसूले तक वसूले जा रहे हैं।
एंबुलेंस के लिए जिला प्रशासन की ओर से कोई रेट निर्धारित नहीं किया गया है। जिसका फायदा हमेशा से एंबुलेंस संचालक उठाते आए हैं। इस आपदा काल में भी एंबुलेंस संचालकों द्वारा लोगों से मनमानी वसूली की जा रही है। उनके द्वारा लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए मुंहमांगी कीमत मांगी जा रही है। अपने मरीज की खराब हालत को देखते हुए लोग उनके द्वारा मांगी गई धनराशि को देने के लिए विवश हैं। वहीं अन्य जगहों पर भले ही एंबुलेंस का भाड़ा निर्धारित किया गया हो लेकिन जनपद में ऐसा नहीं है। जिला प्रशासन की ओर से सभी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ा रहा है। आम दिनों में लोकल भाड़ा 800 से 1000 तक, बनारस जाने का 3000 रुपये और लखनऊ का 6500 रुपये लिया जाता है। लेकिन वर्तमान में यह भाड़ा दुगुना से अधिक हो चुका है।
शव ले जाने पर बढ़ जा रहा भाड़ा
आजमगढ़। एंबुलेंस संचालक डेड बॉडी को शमशान या कब्रिस्तान ले जाने के लिए भी मनमाना चार्ज वसूल रहे हैं। गुरुवार को जहानागंज थाना क्षेत्र के बबुरा गांव निवासी एक व्यक्ति की जिला अस्पताल लाया गया था। जहां उसकी मौत हो गई। शव को घर तक पहुंचाने के लिए परिजन सरकारी एंबुलेंस खोजने लगे जब वह नहीं मिली तो प्राइवेट एंबुलेंस वालों से बात की। एंबुलेंस संचालकों द्वारा 25 से 30 किमी दूरी का उनसे 6000 रुपये वसूला गया। बाजार में सभी एंबुलेंस संचालक लोगों से भारी-भरकम चार्ज वसूल रहे हैं। मजबूरी में लोग उसे देने को भी विवश हैं।
प्रशासन की चुप्पी से नहीं है कार्रवाई का भय
आजमगढ़। एक तो प्रशासन की ओर से एंबुलेंस संचालन का कोई रेट निर्धारित नहीं किया गया है। दूसरे आपदा की इस घड़ी में भी उनके द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसके कारण एंबुलेंस संचालकों के हौसले बुलंद हैं उनके द्वारा लोगों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है। मरीजों के परिजन भी इसकी शिकायत करने नहीं जाते हैं। क्योंकि आफत की इस घड़ी में वह किसी पचड़े में पड़ने की बजाए अपने मरीज का उपचार कराना ज्यादा जरूरी समझ रहे हैं।
30 किमी का देना पड़ा छह हजार रुपये
जहानागंज थाना क्षेत्र के बबुरा गांव की दूरी जिला मुख्यालय से लगभग 25 से 30 किमी होगी। इस गांव के रमेश सरोज ने बताया कि एक व्यक्ति की तबियत खराब होने पर लोग आटो से उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव को घर ले जाने के लिए पहले सरकारी एंबुलेंस की तलाश की गई लेकिन जब वह नहीं मिली तो प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों के पास पहुंचे। उनके द्वारा छह हजार रुपये मांगे गए। कम करने पर ले जाने से मना कर दिया। मजबूरी के कारण वह पैसा देना पड़ा।
मजबूरी में लोग चुका रहे हैं अधिक किराया
जहानागंज थाना क्षेत्र के ही बसगित गांव निवासी एक व्यक्ति की तबियत खराब होने पर लोग उसे आटो से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। कन्हैया निषाद ने बताया कि उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। हमने आपस में सलाह कर उसे वेदांता अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। इसके लिए जब एक एंबुलेंस संचालक से बात की गई तो उसे 1500 मीटर दूरी के लिए 3000 रुपये मांगे। कुछ कम करने की बात पर उसने जाने से इंकार कर दिया। मजबूरी में उसे तीन हजार देकर मरीज को लेकर वेदांता पहुंचे।
लखनऊ के लिए दिए 26000 रुपये
नगर कोतवाली क्षेत्र के बलरामपुर निवासी विक्की चौरसिया ने मऊ जनपद निवासी अपने मौसा को बुलाकर इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उन्हें सांस लेने में दिक्कत थी। आक्सीजन की व्यवस्था न होने के कारण उन्होंने लखनऊ ले जाने का निर्णय लिया। इसके लिए जब एंबुलेंस चालकों से संपर्क किया तो उनके द्वारा 26000 रुपये की मांग की गई। मजबूरी थी इसलिए पूरा पैसा देकर अपने मौसा को लेकर लखनऊ गए।