दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत के गिरने की घटना ने आजमगढ़ में जर्जर भवनों की हकीकत भी सामने ला दी है। जिले में शहर से लेकर गांव तक 150 से अधिक जर्जर भवन हैं।
इनमें रहने वाले परिवार दरकती दीवारों और कमजोर छतों के नीचे जिंदगी गुजार रहे हैं। विडंबना यह है कि कुछ दिन पहले तक प्रशासन के स्तर पर एक भी भवन चिह्नित नहीं था।
हालिया हादसे के बाद नगर पालिका आजमगढ़ ने सर्वे कराया तो शहर में 45 जर्जर भवन चिह्नित किए गए। अब दिल्ली की घटना के बाद जिले के सभी नगर निकायों को जर्जर भवनों को चिह्नित करने का आदेश जारी किया गया है।
जिले के कई इलाकों में पुराने मकानों की हालत देखकर ही उनके खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। कहीं दीवारें झुक चुकी हैं तो कहीं छत का प्लास्टर और मलबा गिर रहा है। बारिश ने इन भवनों के खतरे को और बढ़ा दिया है।
कई परिवार आर्थिक मजबूरी में इन्हीं मकानों में रह रहे हैं। कुछ जर्जर भवनों में दुकानें संचालित हो रही हैं तो कई में किरायेदार और परिवार रह रहे हैं। सरकारी भवन भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं।
पिछले सप्ताह शहर के बाजबहादुर मोहल्ले में जर्जर मकान की छत गिरने के बाद मुख्य राजस्व अधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी नगर निकाय संजीव ओझा ने नगर पालिका आजमगढ़ को जर्जर भवन चिह्नित करने का निर्देश दिया था।
नगर पालिका ने शहर में 45 भवन चिह्नित किए। इसके बाद रविवार को दिल्ली के सत्य निकेतन में जर्जर मकान गिरने से चार छात्रों की मौत की घटना सामने आई तो प्रशासन ने जिले के सभी नगर निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में जर्जर भवनों का सर्वे कर चिह्नित करने का आदेश जारी किया।
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सीन-1 : आसिफगंज में जर्जर भवन में चल रहीं दुकानें :
शहर के आसिफगंज मोहल्ले में जर्जर भवन में दुकानें संचालित हो रही हैं। भवन की हालत देखकर यहां आने वाले दुकानदारों और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा होता है।
सीन-2 : दलालघाट मार्ग पर जर्जर मकानों में रह रहे परिवार : दलालघाट जाने वाले मार्ग पर कई पुराने और जर्जर भवन हैं। इनमें कुछ परिवार रह रहे हैं। बारिश के दौरान कमजोर हो चुके इन भवनों का खतरा और बढ़ गया है।
सीन-3 : पुराने जेल के पास सरकारी भवन भी जर्जर : पुराने जेल के पास सरकारी जर्जर भवन मौजूद है। इसमें भी लोगों के रहने की बात सामने आ रही है। सरकारी भवन की स्थिति ही जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े करती है।
सीन-4 : मुख्य चौक पर खतरे के बीच दुकानदारी : शहर के मुख्य चौक में भी जर्जर भवन है। इसमें दुकानें संचालित हो रही हैं। दिनभर यहां लोगों की भीड़ रहती है, ऐसे में भवन का कोई हिस्सा गिरा तो बड़ा हादसा हो सकता है।
सीन-5 : बाजार में जर्जर भवन, नीचे चल रहीं दुकानें : मुख्य चौक के ही दूसरे हिस्से में जर्जर भवन में दुकानें चल रही हैं। कमजोर भवन के नीचे कारोबार और ऊपर जर्जर ढांचा किसी अनहोनी की आशंका को बढ़ा रहा है।
सीन-6 : मुख्य मार्ग पर परिवार के साथ रह रहे लोग : शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित जर्जर भवन में परिवार रहकर गुजर-बसर कर रहा है। आवाजाही वाले मार्ग पर भवन का मलबा गिरने की स्थिति में राहगीर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
सीन-7 : कालीनगंज में किराये और अपने मकान में लोग : कालीनगंज क्षेत्र में भी जर्जर भवन हैं। इनमें कुछ लोग किराये पर रहते हैं तो कुछ अपने मकान में रह रहे हैं। कमजोर दीवारों और छतों के बीच रहने वाले परिवारों की सुरक्षा चिंता का विषय है।
सीन-8 : बच्चा बाबू पेट्रोल पंप के पास खड़ा जर्जर भवन : बच्चा बाबू पेट्रोल पंप के पास स्थित जर्जर भवन बारिश के दिनों में खासा खतरनाक हो गया है। इसके आसपास लोगों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद अब तक यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं दिखते।
सीन-9 : स्कूल के सामने जिला परिषद का जर्जर भवन : अहरौला के मतलूबपुर में थाने और आबादी के बीच स्कूल के सामने जिला परिषद का पुराना जर्जर भवन है। आसपास स्कूल होने के कारण सैकड़ों बच्चे रोज यहां से गुजरते हैं। ऐसे में भवन का कोई हिस्सा गिरना बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
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केस-1
छत गिरी तो मलबे में दब गई थीं मां-बेटी
आजमगढ़। जिले में जर्जर भवन से हादसा होने की घटना कुछ दिन पहले ही सामने आ चुकी है। शहर के बाजबहादुर मोहल्ले में कादरी मस्जिद से सटे कलक्ट्रेट के पूर्व पेशकार स्व. अयूब का तीन मंजिला जर्जर मकान बारिश के दौरान हादसे का शिकार हो गया। बृहस्पतिवार सुबह मकान की दूसरी मंजिल की छत अचानक भरभराकर गिर गई। मलबे में दबने से स्व. अयूब की पत्नी अनवारी बेगम और उनकी बेटी सलमा बानो घायल हो गईं। दोनों को मलबे से निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। संवाद
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केस-2
दो दिन पहले दो मंजिला मकान का बारजा गिरा, दो बच्चियां घायल
अहरौला। थाना क्षेत्र के पारा फुलवरिया बाजार में छह अगस्त को लगातार बारिश के बीच इकबाल के दो मंजिला मकान का बारजा अचानक गिर गया था। मकान के नीचे संचालित जनरल स्टोर में हादसे के समय दुकानदार, ग्राहक और उसकी मां मौजूद थे। इन्हें मामूली चोटें आईं, जबकि रिश्तेदार की दो बच्चियां मलबे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। स्थानीय लोगों ने मलबा हटाकर दोनों बच्चियों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। एक बच्ची का माहुल के निजी अस्पताल और दूसरी का फुलवरिया में उपचार कराया गया। बारजा गिरने से जनरल स्टोर भी क्षतिग्रस्त हो गया।
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सरकारी भवन भी खतरे की जद में
जर्जर भवनों का खतरा केवल निजी मकानों तक सीमित नहीं है। जिले में पुराने और कमजोर सरकारी भवन भी हैं। इनमें कर्मचारियों के साथ आम लोगों की भी आवाजाही होती है। ऐसे भवनों की समय रहते जांच और मरम्मत नहीं हुई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। अब प्रशासन की ओर से सभी नगर निकायों को ऐसे भवनों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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जर्जर भवनों को चिह्नित करने का निर्देश
मुख्य राजस्व अधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी नगर निकाय संजीव ओझा ने बताया कि जिले में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक जर्जर और खतरनाक भवनों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी नगर निकाय अपने क्षेत्रों में ऐसे भवनों की पहचान करेंगे। भवनों की स्थिति का आकलन कर आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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फोटो संख्या-
शहर में कई पुराने मकान वर्षों से जर्जर हालत में खड़े हैं। कई जगह नीचे दुकानें चल रही हैं और ऊपर मकान में लोग रह रहे हैं। बरसात में दीवारों से पानी टपकता है और छत का मलबा भी गिरता रहता है। अब प्रशासन ने भवन चिह्नित करने का आदेश दिया है तो उम्मीद है कि सिर्फ सूची बनाकर काम खत्म नहीं किया जाएगा, बल्कि खतरनाक भवनों पर कार्रवाई भी होगी। -नवीन सिंह, आसिफगंज।
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फोटो संख्या-
जर्जर मकानों का खतरा कोई नया नहीं है। लोग लंबे समय से इसकी शिकायत करते रहे हैं। पिछले दिनों मकान की छत गिरने से मां-बेटी के घायल होने की घटना के बाद अब प्रशासन सक्रिय हुआ है। शहर में 45 भवन चिह्नित किए गए हैं तो इन भवनों की वास्तविक स्थिति की जांच भी होनी चाहिए। - राकेश अग्रवाल, मुख्य चौक।
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जिले में जर्जर और खतरनाक भवनों को चिह्नित करने के निर्देश सभी संबंधित नगर निकायों को दिए गए हैं। भवनों की स्थिति का सर्वे कर उनकी गंभीरता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे भवन जिनसे लोगों की जान-माल को खतरा है, उनमें सुरक्षा के लिए नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे। बारिश के मौसम को देखते हुए इस कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।- संजीव ओझा, मुख्य राजस्व अधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी नगर निकाय।
शहर के आसिफगंज मुहल्ले में एक जर्जर भवन में संचालित हो रही दुकान। संवाद
शहर के आसिफगंज मुहल्ले में एक जर्जर भवन में संचालित हो रही दुकान। संवाद
शहर के आसिफगंज मुहल्ले में एक जर्जर भवन में संचालित हो रही दुकान। संवाद
शहर के आसिफगंज मुहल्ले में एक जर्जर भवन में संचालित हो रही दुकान। संवाद