आजमगढ़। शिल्प अनुसंधान एवं विकास संस्थान के तत्वावधान में सोमवार को विश्वकर्मा मंदिर के परिसर में भगवान विश्वकर्मा भगवान विश्वकर्मा की महिमा की चर्चा और भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्व. ज्ञानी जैल सिंह स्मृति का आयोजन किया गया। इंजीनियर राम नरायन शर्मा ने कहा कि उपनिषदों, महापुराणों, रामायण, महाभारत शिल्पशास्त्रों में भगवान विश्वकर्मा की अधिष्ठाता देव के रुप विभूषित है।
रामआसरे विश्वकर्मा ने कहा कि शिल्पकार समाज का अपना इतिहास रहा है,अगर इस समाज पर कोई जुल्म अत्याचार करता है तो यह समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। डा. कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा ने कहा कि हम सभी को आपसी भाईचारे को मजबूत रखने के साथ ही अच्छी सोच के साथ परिश्रम से जीवन यापन करना चाहिए। अधिवक्ता राजेश विश्वकर्मा ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति संपूर्ण भारत के प्रेरणा श्रोत रहे। उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष पूर्वक बिता और संघर्ष के कारण ही राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर हीरा लाल शर्मा, वीरेंद्र विश्वकर्मा, कैलाश विश्वकर्मा, डा. पीके विश्वकर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।