बदसगड़ी। विगत कई दिनों से लोग ठंडी को भूलने लगे थे। कई लोगों ने तो रजाइयों को रख दिया था। लेकिन बुधवार को मौसम ने करवट ली और एक बार फिर ठंड का अहसास किया। मौसम में आए बदलाव ने किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी।
बुधवार को सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए हुए थे। कुछ देर के लिए धूप निकली लेकिन धूप में गर्मी नहीं थी। बदली के साथ ही तेज चल रही पछुआ हवाओं ने लोगों को सिकुड़ने के लिए विवश कर दिया। हालांकि हल्की बूंदाबांदी भी हुई। इस बदली ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी। अगर बारिश होती है तो जिन किसानों के आलू की फसल अभी खेतों में है उसके सड़ने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। ओला पड़ने से गेहूं की फसलों को भी नुकसान पहुंचेगा। जिसके लेकर किसान चिंतित हैं। किसान रामदरश सिंह, जयप्रकाश मौर्य, श्रीप्रकाश, राधेश्याम का कहना है कि अगर बारिश हुई तो उन्हें फायदा होगा लेकिन अगर ओले पड़ गए तो फसलों को नुकसान पहुंचेगा। सरसों की फसल फूलों से लदी हुई हैं। अगर ओला पड़ता है तो इसके झड़ने और फसल के टूटने का खतरा है।
नीम के पौधों को मार गया पाला
सगड़ी। इस बार ठंड ने जहां आमजनमानस को खूब परेशान किया वहीं उसने पेड़ पौधों पर भी अपना कहर ढाया है। ठंड का असर नीम की पत्तियों पर भी देखने को मिल रहा है। जिसका परिणाम है कि नीम की पत्तियां झुलस गई हैं। जो अब पेड़ की डाली से अलग हो रही हैं। हालांकि फसलों पर तो इसका विशेष असर नहीं पड़ा लेकिन नीम और तुलसी के पौधे झुलस गए। नीम के बड़े-बड़े पेड़ की पत्तियां सूख गई। ठंड से पहले हरी नजर आ रही तुलसी की पत्तियां भी झुलस गई। इनको देखकर ऐसा लगता है कि पूरा पेड़ ही सूख गया हो। लेकिन नीम के पेड़ों की झ़ुलसी पत्तियां अब गिरने लगी है। उनके स्थान पर नई कोपलें बाहर निकल रही हैं। लेकिन तुलसी के पौधों में ऊपर की डालियां सूख चुकी हैं। कृषि वैज्ञानिक डा. रणधीर नायक ने कहा कि इस बार तापमान काफी नीचे आ गया था। जिसके कारण इन्हें पाला मार दिया और पत्तियां झुलस गई।