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हाथ में आया सिर्फ 50 फीसदी धन, भरने में उड़ेगा होश

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आजमगढ़। शिकायत के आधार पर जिले में हुई 11 बुनकर समितियों की जांच में सभी समितियों की बैलेंस सीट ही कूट रचना पाए जाने पर अनुदान के रूप में पाए गए पूरे धन की रिकवरी की संस्तुति जांच टीम की ओर से की गई है। बुनकरों के नाम पर अनुदान लेने में जमकर खेल हुआ था। समितियों के हाथ में लगभग 50 फीसदी ही धन आया था। अब रिकवरी की संस्तुति के बाद पूरी धनराशि चुकाने को लेकर समिति संचालकों की सांसें फूलने लगी हैं।
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हथकरघा विभाग के डायरेक्टर की ओर से मुबारकपुर की 11 समितियों भारती हैंडलूम पुरारानी, विकास बुनकर नयापुरा, न्यू इंडिया हैंडलूम पुरा खिजिर, संगम हैंडलूम पुरारानी, सिल्क हैंलूम समौधी, इंडियन हैंडलूम पुरा दीवान, शमा इंडिया पुरा दीवान, भारत हैंडलूम पुरा रानी, डायमंड सिल्क पुरा रानी, रेशमी करघा उद्याग कटरा, आधुनिक बुनकर संघ पुरा सोफी की जांच पूरी हो चुकी है। जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने 11 समितियों की ओर से अनुदान की राशि का दुरुपयोग करने की पुष्टि करते हुए जांच अ धिकारी अपर अर्थ एवं संख्याधिकारी सुनील सिंह, मुख्य कोषाधिकारी विजय शंकर और सहायक निबंधक राम किंकर की रिपोर्ट को डायरेक्टर हथकरघा विभाग को भेज दिया है। अब रिकवरी और कार्रवाई को लेकर समिति संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
नाम न छापने की शर्त पर एक समिति संचालक ने बताया कि अनुदान की राशि प्राप्त करने में बड़े पैमाने पर खेल हुआ था। अनुदान देने के लिए अधिकारियों की ओर से पहले अनुदानित राशि में लगभग 40 फीसदी की कटौती कर ली थी। समितियों के हाथ में 60 फीसदी ही राशि आई थी। इसके बाद दो बार इन समितियों की जांच पहले भी हो चुकी है। दोनों ही जांचों में ये समितियां पाक-साफ साबित हुई थी। स्पष्ट है कि बिना खेल के क्लीन चिट भी नहीं मिली थी। इस स्थिति में समितियों की जेब में लगभग 50 फीसदी ही धनराशि आई थी। अब जांच समिति के रिपोर्ट के अनुसार रिकवरी हुई तो समिति तो शत प्रतिशत धनराशि जमा करनी होगी।
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किस समिति से कितनी रिकवरी
समिति धनराशि सभापति/सचिव
भारती हैंडलूम पुरारानी 1388400 खैरुल बशर/शाहनवाज
विकास बुनकर नयापुरा 854400 दानिश/कासिम
न्यू इंडिया हैंडलूम पुरा खिजिर 1730000 शफीक अजमल/गुलाम अशरफ
संगम हैंडलूम पुरारानी 1514600 ज्याउल हक/नसीमरजा
गोल्डेन सिल्क हैंडलूम समौधी 1601400 शाहनवाज/असरारुल हक
इंडियन हैंडलूम पुरा दीवान 1685600 जफरुल/मजहर सादात
शमा इंडिया पुरा दीवान 1817200 महमूद अख्तर/शफीक अहमद
भारत हैंडलूम पुरा रानी 1710400 सईदुल्ला/मजहर
डायमंड सिल्क पुरा रानी 824600 शाहनवाज/शाह खालिद
रेशमी करघा उद्योग कटरा 917800 वसीम अख्तर/सुदेश्वर चौहान
आधुनिक बुनकर संघ 0 इफ्तेखार/सैफुरर्हमान

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जांच दबाने के लिए बहुत हुई कोशिश
आजमगढ़। शिकायत के आधार पर जांच शुरू होते ही समिति संचालकों में खलबली मच गई थी। इसके साथ ही इसे रोकने के लिए लाबिंग भी शुरू हो गई थी। जांच रुकवाने के लिए एक वरिष्ठ भाजपा नेता तो सक्रिय थे ही, लेकिन एक वरिष्ठ बसपा नेता का सक्रिय होना भी चर्चा का विषय रहा। पहले तो कहा जाता था कि शिकायत इन्ही से संबंधित है। बाद में यही जांच रोकने के लिए अधिकारियों की पैरवी करने लगे। हालांकि जांच में तो उनकी तो नहीं तल पाई, अब आगे भविष्य के पिटारे में छिपा है।
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अब डायरेक्टर पर टिकी बुनकरों की नजर
आमजगढ़। समितियों की जांच रिपोर्ट को लेकर मुबारकपुर के बुनकरों में काफी उत्साह है। सभी बुनकरों की इच्छा है कि समति संचालकों और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। इस स्थिति में उनकी नजर पर हथकरघा विभाग के डायरेक्टर पर टि की हुई है कि जांच रिपोर्ट पर आरोपी समितियों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है। वहीं, जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि रिपोर्ट डायरेक्टर को भेजी जरूर गई है, लेकिन वहां से कार्रवाई नहीं होने की दशा में स्थानीय स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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इन पर होगी कार्रवाई
आजमगढ़। जांच समिति की ओर से समिति के सभापति और सचिव को दोषी तो बताया ही गया है, साथ ही फर्जी बैलेंशशीट बनाने वाले सीए, विभागीय क्षेत्रीय पर्यवेक्षक, निरीक्षक और विभागीय अधिकारियों को भी इस फर्जीवाड़े के लिए दोषी बताया गया है। प्राप्त का अनुदान बुनकरों के फायदे में लगाना था, लेकिन समिति संचालकों की ओर से कूट रचित बिल और बाउचर्स के माध्यम से धन का खुद उपयोग कर लिया गया। इस धन से ग्राहकों को छूट भी दे दी गई।
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अन्य समितियां भी कठघरे में
आमजगढ़। 11 समितियों की तो तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन कर शिकायत की जांच कराई, लेकिन मुबारकपुर में ऐसी समितियों की संख्या लगभग 150 है। इन समितियों को एनएचडीपी योजना के तहत दो बार में बुनकरों के उत्थान के लिए 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि मिली है। जांच रिपोर्ट में लिखा गया है कि हथकरघा विभाग की ओर से उपलब्ध कराई सभी समितियों की रैंडम जांच में इसी प्रकार का फर्जीवाड़ा मिला है। इसक अर्छ ये है कि किसी भी समिति को मिली धनराशि का फायदा बुनकरों को नहीं मिला है। विभाग ने रिपोर्ट पर गौर किया तो इन समितियों पर भी शिकंजा कसना तय है।
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