ठोकर बनाने के लिए डाला गया सफेद बोल्डर। संवाद
आजमगढ़। मानसून के दस्तक देने के पहले सिस्टम की सुस्ती से बाढ़ प्रभावित देवारा क्षेत्र में कटानरोधी कार्य पूरे नहीं हो सके हैं। बाढ़ खंड की उदासीनता के कारण देवारा के लोगों को फिर कटान की चिंता सताने लगी है। कटान रोकने के लिए जियो बैग, बोल्डर डालने का काम हो या फिर बंधे का रेनकट भरने का काम सभी अधूरे हैं। घाघरा नदी से सटे देवारा के लगभग 132 गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। इसमें से 10-15 गांव अतिसंवेदनशील हैं जहां बाढ़ का खतरा आबादी तक पहुंच जाता है। सैकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि कटान की जद में समा जाती है। पिछले साल गंगापुर और झगरहवा में कटान घरों के करीब पहुंच गई थी। आबादी को कटान से बचाने के लिए गंगापुर, झगरहवा में 15 करोड़ से जियो बैग, बोल्डर और बंबूक्रेट डाला जाना है। बंधे के रेनकट का मरम्मत कराना है। 15 जून से पहले सभी कटानरोधी काम पूरा किया जाना था, लेकिन विभाग की उदासीनता के कारण अभी तक 50 प्रतिशत काम पूरा हो पाया है। अब चार दिनों में बचे 50 प्रतिशत काम पूरा होना मुश्किल है।