फरिहां। ग्राम पंचायत फरिहां को जिलाधिकारी ने गोद ले रखा है। इसके बाद भी इस गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का माखौल उड़ रहा है। स्वास्थ्य महकमा डीएम के गोद लिए गांव के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहा है। गांव स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर की तैनाती नहीं है और सिर्फ फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल का संचालन कराया जा रहा है। निजामाबाद तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फरिहां ग्राम सभा को जिलाधिकारी ने गोद ले रखा है। इसके तहत ही गांव में स्थित एएनएम सेंटर को उच्चीकृत कर नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तब्दील किया गया। इतना ही नहीं इस केंद्र में प्रसव की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, लेकिन इसका लाभ आज तक ग्रामीणों को नहीं मिल सका है। कारण यह है कि स्वास्थ्य महकमा जिलाधिकारी के गोद लिए गांव में एएनएम सेंटर का उच्चीकरण तो करा दिया लेकिन आज तक यहां एक अदद महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं की जा सकी। शुरूआत में एक डॉक्टर यहां बैठते थे लेकिन वह भी स्थानांतरण करा कर चले गए, तब से अस्पताल का संचालन फार्मासिस्ट धर्मेंद्र कुमार शर्मा द्वारा किया जा रहा है। प्रदेश सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा घर के पास ही उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन महकमा सरकार के इस दावे को खोखला साबित कर रही है। अस्पताल पर महिला डॉक्टर अथवा महिला नर्स की तैनानी न होने से प्रसव की सुविधा नहीं शुरू हो सकी है। यहां सात स्टाफ की तैनाती है, लेकिन मौके पर मौजूद तीन या चार ही मिलते है। परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है और नालियां बजबजा रही है। मेन गेट से लेकर अस्पताल परिसर के सारे दरवाजे-खिड़कियां जर्जर हाल में पहुंच चुके है। लोगों का कहना है कि अस्पताल की दशा सुधारने के लिए कई बार स्वास्थ्य महकमें को पत्रक दिया जा चुका है। इसके बाद भी विभाग के लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। जब डीएम के गोद लिए गांव के अस्पताल की यह स्थिति है तो अन्य अस्पतालों की क्या होगी यह आसानी से समझा जा सकता है।