आजमगढ़। नगर के नेहरू हाल परिसर में रविवार की देर शाम हरिहरपुर कजरी महोत्सव का आगाज हुआ। दो दिवसीय इस कजरी महोत्सव का शुभारंभ पालिकाध्यक्ष शीला श्रीवास्तव और डा. गायत्री कुमार ने दीप प्रज्ज्वलन किया। एक समय था जब सावन के महीने पर हर ओर कजरी की मधुर धुन सुनने को मिलती थी। यहां तक कि झूला झूलते हुए, खेतों में धान की रोपाई करते समय भी महिलाएं इन कजरी गीतों को गाती थी। धीरे-धीरे समय बदला और डीजे की धुन पर थिरकने वाले युवा इन गीतों को भूलते गए। श्यामा श्याम लगत अति नीको, झूलत श्याम झूलनवां ना जैसे प्रसिद्घ गीत सुनने को नहीं मिलते। आज यह विधा विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। इस विधा को बचाने के प्रयास में जुटे हरिहरपुर घराने के कलाकारों द्वारा प्रतिवर्ष कजरी महोत्सव का आयोजन किया जाता है। अपने इस प्रयास के तहत हरिहरपुर घराने की ओर से नेहरू हाल में दो दिवसीय कजरी महोत्सव का आयोजन किया गया है। जिसका रविवार की देर शाम शुभारंभ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन के बाद वेदांता स्कूल के बच्चों ने गणेश वंदना प्रस्तुत किया। इसके बाद आदर्श मिश्रा ने हरे राम रिमझिम से बरसे ला.., सुनाकर सभी का मन मोह लिया। इसके बाद ऋषिकेश मिश्रा ने श्याम सखी मोरी चुनरी खींच और बरसे काली रे बादरिया, मोरी चुनरिया भीगी जाए, सुनाकर लोगों की खूब वाहवाही लूटी। इस दौरान कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति की जिसे सुनने के लिए देर रात तक श्रोता जमे रहे।