लाटघाट। नेपाल से घाघरा में छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक पानी का असर अब दिखने लगा है। कई दिनों तक घटने के बाद रविवार को नदी का जलस्तर बदरहुंआ में स्थिर रहा लेकिन डिघिया में चार सेमी की बढ़ोत्तरी देखने को मिली। सोमवार को इसमें और बढ़ोत्तरी होने की संभावना जताई जा रही है। नदी के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की चिंता को बढ़ा दिया है। विगत 24 घंटे में डिघिया गेज पर घाघरा का जलस्तर चार सेमी बढ़ा जबकि बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर स्थिर रहा। घाघरा नदी लाल निशान से डिघिया गेज पर 106 सेमी और बदरहुंआ गेज पर 52 सेमी उपर बह रही है। बदरहुआ गेज पर शनिवार को नदी का जलस्तर 72.20 मीटर रिकार्ड किया गया जो रविवार को भी उतना ही रहा। वहीं डिघिया गेज पर शनिवार को नदी का जलस्तर 71.42 मीटर दर्ज किया गया था जो रविवार को चार सेमी बढ़कर 71.46 मीटर हो गया। बदरहुंआ गेज पर नदी का खतरा बिंदू 71.68 मीटर और डिघिया गेज पर 70.40 मीटर है। सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर बहने वाली घाघरा नदी का रौद्र रूप बढ़ता जा रहा है। हरैया ब्लाक के देवारा खास राजा के त्रिलोकी का पुरवा के विस्थापित हुए लोग दूसरा ठिकाना खोजने में लगे हुए हैं। प्रधान पति पल्टन यादव ने कहा कि दो माह पूर्व माप करके गांव में ही आरक्षित जमीन दे दिया गया था। जिस पर मड़ई डालकर त्रिलोकी के पुरवा के राम दरस, रामजनम, श्यामधारी, बीरबल, राजेंद्र, श्रवण, संजय, लालचंद, लाल बहादुर, प्रकाश, राजू आदि रह रहे थे। शनिवार से विस्थापित हुए सभी लोग पुन: मड़ई व जरूरत के सामान हटा रहे हैं। ग्राम प्रधान ने कहा कि जल्द ही इनकी व्यवस्था कर दी जाएगी। पानी जैसे हटता है इन्हें दूसरी जगह बसा दिया जाएगा। नेपाल से छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक पानी का असर अब नदी में दिखने लगा है। सोमवार से नदी के बढ़ाव में तेजी आने की संभावना है। प्रशासन की ओर से चेतावनी जारी कर दी गई है।
मदद के इंतजार में त्रिलोकी का पुरवा के विस्थापित
लाटघाट। देवारा खास राजा के त्रिलोकी के पुरवा के विस्थापितों को अभी तक प्रशासन की कोई मदद नहीं मिली है। मदद न मिलने से लोग मायूस हैं। ग्राम प्रधान द्वारा राशन और जमीन मुहैया कराई गई लेकिन अभी तक उन्हें सरकारी जमीन नहीं मिली और न ही खाने पीने का कोई सामान मिला। इनको विस्थापित हुए अब तक एक सप्ताह हो गया। लेकिन अभी तक प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
बाढ़ प्रभावित तक नहीं पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
लाटघाट। घाघरा नदी के जलस्तर स्थिर होकर फिर बढ़ना शुरू हो चुका है। बाढ़ प्रभावित 125 गांव की लगभग सवा लाख आबादी पानी से घिरी हुई है। पानी से घिरे गांव में समस्या जस की तस बनी हुई है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम अभी तक नहीं पहुंच रही है। जगह-जगह गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा सता रहा है। वहीं ग्रामीणों के आवागमन के संबंध में एसडीएम सगड़ी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि 104 नाव चलाई जा रही है। जरूरत पड़ने पर और नाव बढ़ा दी जाएगी। घाघरा नदी का कटान तेज हो गई है। एक दिन में लगभग 10से 12 बीघा जमीन कट रही है।