आजमगढ़। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संचालित जिले के 21 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में सामानों की खरीद में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला प्रकाश में आया है। सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर सामानों की खरीद में बड़े पैमाने पर घोटाला की शिकायत की गई है। वहीं मामला उजागर होता देखकर तीन दिन पहले एक लेखाकार ने इस्तीफा दे दिया है।
जिले के कुल 21 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में दो हजार छात्र हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित इन विद्यालयों में सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा बच्चों के रहने और खाने आदि की व्यवस्था की जाती है। परिषदीय विद्यालय के बच्चों को विभाग की ओर से 200 रुपये का स्वेटर उपलब्ध कराया गया है जबकि इन विद्यालयों की छात्राओं को 480 रुपये का। बाजार में जो अंडा छह रुपये में मिलता है उसे नौ रुपये में खरीदा गया है। मामले की शिकायत सिविल कोर्ट की अधिवक्ता विभा सिंह ने शनिवार को शपथ पत्र के साथ मुख्यमंत्री को रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर की। उन्होंने बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत संचालित इन विद्यालयों में सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी शशिकुमार ने करोड़ों रुपये का वित्तीय गमन किया है।
मैंने 30 जून 2017 को यहां पर सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी के पद पर ज्वाइन किया है। दिसंबर में रानी की सराय से भुगतान के लिए पत्रावली आई। मैंने विद्यालय के वार्डेन, एक शिक्षक और रसोइए से सत्यापन कराकर भेजने के लिए लिखकर भेज दिया। यह संभवत: एक परिवार की शिकायत है। क्योंकि रानी की सराय में तैनात लेखाकार अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। यह लोग मुझे यहां से हटाना चाहते हैं।
शशिकुमार, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी।
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जहां तक मुझे मालूम सारी खरीदारी ई-टेंडर के माध्यम से हो रही है। इसलिए इसमें धांधली का सवाल नहीं उठता है। लेकिन मुझे इसके बारे में ज्यादा मालूम नहीं है मैं इस बारे में पता करता हूं।
डा. वीके शर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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ये लगाए गए आरोप
- पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस वित्तीय वर्ष से दो से तीन गुना अधिक दर पर सामानों का भुगतान किया गया।
- वर्ष 2017-18 में जिला चयन समिति द्वारा स्वीकृत टेंडर को निरस्त कर उप्र राज्य कर्मचारी कल्याण निगम से ऊंची दर पर खरीदारी की गई।
- जो सेफ्टीपिन टेंडर के जरिए आठ रुपये गुच्छा मिलना थी उसकी खरीद 48 रुपये पीस की दर से की गई।
- वित्तीय नियमानुसार एक रुपये से 20 हजार रुपये तक की खरीद सीधे की जा सकती है। 20 हजार से एक लाख रुपये तक की खरीद कोटेशन सीमा के अंतर्गत आती है। लेकिन इनके द्वारा सात लाख रुपये तक की सीधी खरीद की गई।