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एक करोड़ से बनी पानी की टंकी, 12 साल में भी नहीं नसीब हुआ पानी

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आजमगढ़। निजामाबाद ब्लाक के गांव ढढ़नी में एक करोड़ की लागत से जल निगम की ओर से पेयजल परियोजना लगाई गई थी। सबकुछ सही बताने के बाद 2005 में इसे ग्राम सभा को हैंडओवर कर दिया गया था। परियोजना से 32 सौ की आबादी लाभान्वित होनी थी। हैंडओवर होने के 12 वर्ष बाद भी ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो पाया है। ग्रामीणों की मानें तो दोयम दर्जे की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होकर बैठ चुकी है। नलकूप के बिजली संचालित यंत्र जले पड़े हैं। बिजली सप्लाई भी बाधित है। दूषित पानी के कारण गांव 2007, 2012, 2014 में हैजा और डायरिया का शिकार भी हो चुका है।
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निजामाबाद तहसील के ढढ़नी गांव में शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए जल निगम की ओर से एक करोड़ की लागत से पेयजल परियोजना का निर्माण कर इसे 2005 में ग्राम पंचायत के सुपुर्द किया गया था। तभी से परियोजना ठप पड़ी हुई है। परियोजना से पांच गांव दासोपट्टी, रुद्मनपुर, परशुरामपुर, ढढ़नी, राजनपुर गांव के 12 सौ घरों की लगभग 3200 की आबादी को लाभ मिलना था। टंकी के निर्माण के बाद पानी की सप्लाई के लिए गांव में जगह-जगह पाइप लाइन बिछाई गई। कुछ जगहों पर टोटीयां भी लगाई गई थीं, लेकिन सब दिखावा रह गया। ग्रामीणों की माने तो जल निगम की ओर से दोयम दर्जे की पाइप लाइन बिछाई गई थी, जो टेस्टिंग के समय ही बैठ गई। इसके अलावा सभी स्थानों पर जल निगम की ओर से पाइप लाइन बिछाई ही नहीं गई थी। वर्तमान प्रधान ने बताया कि हैंडओवर के बाद एक माह तक जहां पाइप लाइनी थी, पानी पहुंचा था। इसके बाद पाइफ लाइन क्षतिग्रस्त हो गया। ग्रामीणों की शिकायत पर 20 दिन पहले डीडीओ ने मौके की जांच भी की थी। जांच में ट्रांसफार्मर जला मिला। इसे बदल वाया गया। नलकूप को पानी दे रहा है, लेकिन लाइन क्षतिग्रस्त होने से पानी गांव तक नहीं पहुंच रहा है। पानी की टंकी और नलकूप के पास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। वहां तक जाने में कोई मार्ग भी नहीं है।

कई बार उठाई मांग, नहीं सुधरी हालत
आजमगढ़। प्रधान राजेंद्र यादव ने बताया कि 2005 में टंकी के हैंडओवर होने पर यहां कोई आपरेटर नहीं था। तत्कालीन प्रधान राम आश्रय राम ने उन्हें और सीपू राय को नलकूप के संचालन के लिए रखा था। एक माह तक टंकी चली थी। लाइन पूरी न बिछने और बिछाई गई लाइन क्षतिग्रस्त होने से टंकी पूरी तरह से ठप पड़ी है। आरोप लगाया कि जल निगम की ओर से पेयजल परियोजना के निर्माण में गोलमाल किया या था। कई बार शिकायत की गई, लेकिन अभी तक टंकी चालू नहीं हो सकी है।
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तीन बार फैल चुका है डायरिया
ग्रामीण श्यामदेव राम ने बताया कि दूषित पानी के इस्तेमाल से गांव में वर्ष 2007, 2012 और 2014 में डायरिया फैल चुका है। तीनों बार काफी संख्या में ग्रामीण बीमार हुए थे। कई के तो जान पर बन आई थी। कई बार शिकायत की गई, लेकिन प्रशासन की ओर से टंकी को चालू कराने के प्रति ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

जरूरत 200 की, हैंपपंप मात्र 30
आजमगढ़। ग्रामीण राम मिलन ने बताया कि आबादी के हिसाब से गांव में लगभग 200 हैंडपंपो की जरूरत है, लेकिन गांव में सिर्फ 300 इंडिया मार्का हैंडपंप हैं। ग्रामीण पेयजल के लिए आज भी छोटे हैंडपंपों पर निर्भर हैं। दूषित पानी की वजह से वो बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।


फोटो
गांव की शीला देवी ने बताया कि परियोजना को सही तरीके से चालू करा दिया जाए तो लगभग 1200 घरों को लाभ मिल सकता है। इसे क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या दूर हो जाएगी। क्षेत्र विकास की ओर अग्रसर हो जाएगा। दूषित जल से तमाम प्रकार की बीमारियां पैदा हो रही हैं।
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