आजमगढ़। राष्ट्रीय प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से रविवार को भोलाघाट स्थित एक विद्यालय परिसर में - प्रेमचंद और आज का समय- संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें -मनोविज्ञान और साहित्य का अंतर संबंध- पुस्तक का लोकार्पण भी इस मौके पर किया गया।
मुख्य वक्ता काशी विद्यापीठ के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराग कुमार यादव ने प्रेमचंद की कई कहानियों की व्याख्या करते हुए तत्कालीन राष्ट्रीय समता और आज के समय को संदर्भित करते हुए विशेष व्याख्या की। संघ के जिलाध्यक्ष लालसा लाल तरंग ने प्रेमचंद द्वारा लिखित नाटकों में कर्बला नाटक में हिंदू मुस्लिम एकता का प्रमाण पेश किया। साहित्यकार पंकज गौतम ने कहा कि प्रेमचंद के पात्र हर किस्म के अत्याचार का विरोध करते हैं। उनके प्रत्येक ग्रंथ में कोई न कोई प्रतिरोधी दरिद्र अवश्य है। उन्होंने आज के जटिल समय की सामाजिक व्यवस्था दी। डा. रविंद नाथ राय, कन्हैया यादव, राजाराम प्रो. आरएन सिंह ने %मनोविज्ञान और साहित्य का अंतर संबंध% पुस्कत का लोकार्पण करते हुए कहा कि मनोविज्ञान और साहित्य दोनों में गहरा संबंध है। प्रेमचंद के साहित्य में मनोविज्ञान कूट-कूट कर भारा है। प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव डा. संजय श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर डा. मनोज, सुरेश सरोज, जयप्रकाश, गुड्डन, हरिकेश, राकेश, तेज बहादुर आदि उपस्थित थे।