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आमजन छोड़िए, बिजली विभाग से जिलाधिकारी भी परेशान

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आजमगढ़। अभी तक बिजली विभाग क ा मनमाना बिल आम लोगों को परेशान करता है। लेकिन जिलाधिकारी भी अब बिजली विभाग के मनमाने बिल से परेशान हो गए हैं। बिना मीटर देखे और जमा की गई धनराशि को भी बिल से न घटाकर आने वाले बिल से परेशान एडीएम प्रशासन ने बिजली अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई है। उन्होंने कलक्ट्रेट और तहसील कार्यालयों में मीटर देखकर स्थानीय अधिकारी और कर्मचारी से बिजली प्रमाणित करा समय पर बिल भेजने का निर्देश दिया है।
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बिजली विभाग द्वारा भेजे जा रहे मनमाने बिल को सही कराने के लिए आम लोगों को अधिकारियों की मिन्नतें करती पड़ती हैं। तब कहीं जाकर उनकी समस्याओं का निस्तारण हो पाता था। अब बिजली विभाग के बिल की गड़बड़ियों से कलक्ट्रेट और तहसील मुख्यालयों के अधिकारी भी परेशान हो गए हैं। बिजली विभाग की ओर से आने वाले मनमाने बिल इनके भी होश उड़ा रहे हैं। बिना मीटर रीडिंग लिए ही बिल भेजा जा रहा है। जो धनराशि पहले जमा की जा चुकी है, बिल से उसे भी घटाया नहीं जा रहा है। बिल को कलक्ट्रेट और तहसीलों के कर्मचारियों और अधिकारियों से प्रमाणित भी नहीं कराया जाता। इतना ही नहीं प्रत्येक माह बिल भी नहीं मिल रहा है। विभाग की ओर से एक ही बार में सात-आठ माह का बिल थोप दिया जाता है और 90 हजार से एक लाख तक का सरचार्ज भी लगा दिया जाता है।
बिजली विभाग के इस मनमाने रवैये पर जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी और आडिट टीम ने सख्त आपत्ति जताई गई है। निजामाबाद तहसील में बिल से अधिक लगभग एक लाख की धनराशि बिजली विभाग को स्थानांतरित हो गई थी। नये बिल में इसे घटाया भी नहीं गया है। प्रभारी अपर जिलाधिकारी प्रशासन आलोक वर्मा ने सभी विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर सख्त निर्देश दिए हैं। सभी को अपने खंड के कलक्ट्रेट या तहसीलों में लगे मीटर का निरीक्षण कर और संबंधित कर्मचारी और अधिकारी से प्रमाणित कर ही बिजली बिल भेजें।
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बिजली विभाग की ओर से मनमाने तरीका से बिल भेजा जा रहा है। न मीटर देखा जा रहा है और ना ही समय पर बिल मिल रहा है। इस बारे में उन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं। अब सत्यापित बिल पर ही भुगतान किया जाएगा।
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आलोक वर्मा, प्रभारी एडीएम प्रशासन
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