रानी की सराय। जनपद में देश के लिए शहादत देने वालों की लंबी फेहरिस्त है। कई नाम ऐसे हैं जिन्हें लोग आज भी नमन करते हैं। चाहे कारगिल शहीद रामसमुझ यादव हो या चीन के सैनिकों को मारकर उनसे उनका हथियार छीनने वाले शहीद सौदागर सिंह हों। ऐसे रणबांकुरों से प्रेरणा लेकर जिले के युव देश भक्ति का जज्बा लिए सेना में भर्ती होने के सपने देखते हैं। रानी की सराय विकास खंड का चड़ई मड़ैया गांव ऐसा है जिसे सेना के जवानों की नर्सरी कहा जाता है। 80 घरों के इस गांव में 12 लोग वर्तमान में सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस गांव की आबादी करीब 2000 है। जिसमें इंद्रेश यादव, परविंद यादव, अजीत यादव, आशीष यादव, अखिलेश यादव, संतोष यादव, इंद्रजीत यादव, धर्मजीत यादव, घनश्याम निषाद, पंकज यादव, बाबूराम, रामदयाल यादव, जोगिंदर यादव, दयाराम यादव समेत अन्य लोग सेना में तैनात होकर देश की सेवा कर रहे हैं। उक्त लोगों को देखकर यहां की युवाओं में भी देश की सेवा करने का नशा है। आज भी गांव के कई युवा सेना में भर्ती होने का ख्वाब पाले दिन रात मेहनत कर रहे हैं।
इनमें इंद्रेश यादव पुत्र रमेश यादव निवासी चढ़ई मड़ैया शुरू से ही देश की सेवा करना चाहते थे। इन्होंने पहले से ही लक्ष्य बना रखा था कि सीमा पर रखकर हम देश की रक्षा करेंगे। परिवार के सहयोग से और अपनी कड़ी मेहनत से अपने लक्ष्य को हासिल किया और आर्मी में जॉइनिंग लेकर देश की सेवा कर रहे हैं। या दो भाई में सबसे बड़े हैं। इनका छोटा भाई भी देश की सेवा की सेवा करना कहते हैं। वह भी तैयारी कर रहे हैं।
वहीं रानी की सराय के चढ़ई मड़ैया गांव निवासी परविंद यादव पुत्र सुदर्शन यादव का बचपन से ही सपना था कि वह बड़ा होकर देश की सेवा करें। उनके पिता सुदर्शन यादव लेखपाल के पद पर कार्यरत थे। घर से संपन्न होने के कारण उन्हें अपने लक्ष्य में किसी प्रकार की समस्याएं नहीं आई। वह कड़ी मेहनत करते थे। काफी मेहनत के बाद उन्होंने अपने मुकाम को हासिल करते हुए आर्मी ज्वाइन करने में सफल हुए। 2012 में उनकी तैनाती हुई। वह अपने घर में सबसे बड़े हैं।
जबकि अजीत यादव पुत्र लल्लन प्रसाद यादव रानी की सराय थाना क्षेत्र के चढ़ई मड़ैया गांव के निवासी हैं। उनके पिता एक कंपनी में काम करते थे। पिता के रिटायरमेंट होने के बाद सारी जिम्मेदारी अजीत परआ गई। अजीत कड़ी मेहनत कर अपने सपने को साकार किया। आज वह देश की सुरक्षा कर रहे हैं। वह अपने इस कार्य को लेकर खुद पर गर्व महसूस करते हैं। अपने भाई को फौज में देखकर उनके छोटे भाई भी फौज में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं संतोष यादव पुत्र राम अवध यादव सेना में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। संतोष यादव का एक ही सपना था कि वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करें। आज वह सपना उनका साकार हो चुका है। वह कहते हैं कि देश की सेवा ही हमारा सर्व धर्म है। हम इस मिट्टी के लाल हैं और इस मिट्टी के लिए हम अपना सब कुछ न्योछावर कर देंगे। हर एक युवा को चाहिए कि वह देश की सेवा करें। इस मिट्टी ने हम सबको बहुत कुछ दिया है।