आजमगढ़। हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद के 138वीं जयंती पर सूत्रधार संस्थान की ओर से मंगलवार शाम को कहानी बूढ़ी काकी का मंचन अभिषेक पंडित के निर्देशन में किया गया। कलाकारों की प्रस्तुति देखकर पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। बूढ़ी काकी निसंतान बुजुर्ग महिला है। पति के मृत्यु के उपरांत वो अपनी सारी संपत्ति अपने भतीजे बुद्धिराम के नाम कर देती है। बदले में बुद्धिराम ने उसकी देखभाल का वचन देता है। ज्यों समय बीतता गया, बुद्धिराम और उनकी पत्नी रूपा ने उनका खयाल रखना कम कर दिया। बूढ़ी काकी घर के एक कोने में भूखी प्यासी पड़ी रहती और बुद्धिराम और रूपा को कोसती रहती। मंच पर डीडी संजय, डॉ. अलका सिंह, ममता पंडित, अंगद कश्यप, रितेश रंजन, संदीप कुमार का अभिनय दर्शकों को बांधे रखा। रंगदीपन रंजीत कुमार और नंदकिशोर का रहा। नाटक प्रारम्भ होने से पहले लखनऊ के युवा रंगकर्मी आनन्द प्रह्लाद के असामयिक निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया। डॉ. सीके त्यागी, डॉ. अमित सिंह, खुशबू सिंह, डीडी सिंह, डॉ. आशा सिंह, डॉ. पूजा पांडेय, प्रवीण सिंह, अरविंद अग्रवाल, मनीष तिवारी, जनमेजय पाठक उपस्थित रहे।