आजमगढ़। सीडीओ अनिल कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में भूजल सप्ताह (16 से 22 जुलाई) पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। राजकीय पालिटेक्निक के इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने भूजल संरक्षण और संवर्धन के लिए वीडियो क्लिप से लोगों को जागरूक किया। बताया कि एक-एक टपकती बूंद से एक दिन में छह लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। कुलभूषण सिंह ने बताया कि बढ़ती संख्या के कारण जलपूर्ति और जल की मात्रा के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। बारिश का 90 प्रतिशत पानी नदी में बह जा रहा है। सीमित उपलब्धता का असीमित दोहन होता रहा तो 2030 तक मांग की अपेक्षा भूजल की उपलब्धता 50 प्रतिशत ही रह जाएगी। देश के शहरों की हालत दक्षिण अफ्रिका के केपटाउन जैसी होगी, जहां जलश्रोत सूख चुके हैं। देश के बंगलुरू, कोयम्बटूर, सोलापुर, हैदराबाद, अमरावती, जमशेदपुर, कानपुर, जयपुर, गुरुग्राम, शिमला, दिल्ली इत्यादि इसी राह पर हैं। हम पानी बना नहीं सकते सिर्फ बचा सकते हैं। टंकी के ओवर फ्लो के कारण 100 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से 5000 लीटर से 10000 लीटर शुद्ध पानी बर्बाद होता है। आवरफ्लो अलार्म लगा के हम पानी बचा सकते हैं। लीकेज रोकें तो महीने में 1000 लीटर पानी बचेगा। एक स्टडी के मुताबिक लीकेज में एक नल से हर मिनट 45 बूंद टपकती है। यानि तीन घंटे में एक लीटर से ज्यादा पानी बह जाता है। एक मिनट में खुले नल से छह लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। भारत में विश्व की कुल जनसंख्या का 18 फीसदी आबादी है। पृथ्वी पर उपलब्ध जल का चार प्रतिशत शुद्ध जल भारत में उपलब्ध है। 80 प्रतिशत शुद्ध जल कृषि में उपयोग होता है। ड्रिप सिंचाई से 60 से 70 प्रतिशत जल की बचत हो सकती है। भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 के आकड़ों पर पल्हनी और सठियांव ब्लाक क्रिटिकल श्रेणी में जा चुके हैं। अजमतगढ़, मिर्जापुर, रानी की सराय और तहबरपुर सेमी क्रिटिकल स्थिति में हैं। एडीएम वित्त बीके गुप्ता, एडीएम प्रशासन नरेन्द्र सिंह, डीसी एनआरएलएम बीके मोहन, दीपक कुमार, रामअवध यादव, उमेुश, रितेश मिश्रा उपस्थित रहे।