आजमगढ़। जनपद के नव निर्मित कलेक्ट्रेट भवन में सुरक्षा की अनदेखी की गई है। जिसके कारण यहां बंदरों का आंतक रहता है। बंदरों द्वारा फैलाई गई गंदगी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिसे देखते हुए जिलाधिकारी ने बुधवार को कार्यदायी संस्था को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
पुराने कलेक्ट्रेट भवन की जीर्ण-शीर्ण हालत को देखते हुए उसके भवन को गिरा दिया। लेकिन किसी कारण से कई वर्ष तक इसका निर्माण नहीं हो सका। बाद में सपा सरकार ने कलेक्ट्रेट भवन के निर्माण के लिए लगभग 31 करोड़ की लागत निर्धारित की। इसके निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई। कार्यदायी संस्था ने निर्माण तो पूरा कर दिया और सारी आफिसें भी शिफ्ट हो गई। अधिकारी भी इन आफिसों में बैठने लगे। लेकिन बंदरों के आतंक को देखते हुए भी इसमें सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए। जिसके कारण यह आने वाले वादकारियों, शिकायतकर्ताओं को कभी-कभी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कर्मचारियों से मिली शिकायत पर बुधवार को जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने कार्यदायी संस्था को इसके लिए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। हालांकि बंदरों से छुटकारा दिलाने की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की है। लगभग दो वर्ष पूर्व नगरपालिका की ओर से बंदर पकड़ने वालों को बुलाकर बंदरों को पकड़वाया गया था। बंदर पकड़ने वालों को बंदरों को ले जाकर कुसुंहा के जंगल में छोड़ना था। लेकिन उन्होंने इसे शहर से सटे बाजारों और गांवों में छोड़ दिया। जिसका परिणाम हुआ अब बंदर पूरे जनपद में फैल गए।