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मानकों की अनदेखी कर शिक्षकों की तैनाती, ताक पर शिक्षा व्यवस्था

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आजमगढ़। राजकीय बालिका विद्यालयों की दशा दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। मानक की अनदेखी कर राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की जा रही है। कहीं छात्राएं ज्यादा तो शिक्षक कम हैं और कहीं छात्राएं कम हैं तो शिक्षक ज्यादा है। बोर्ड की परीक्षाएं सिर है और प्रमुख विषय के शिक्षक ही नहीं है। छात्राओं की तैयारी स्वयं के भरोसे है। वहीं संबंधित विभाग शासन पर पासा फेंक पल्ला झाड़ रहा है। जिला मुख्यालय पर स्थित जीजीआईसी में वर्तमान शिक्षण सत्र में आठ सौ के लगभग छात्राएं हैं। एक वक्त था जब यहां चार हजार से अधिक छात्राएं थीं। आज 800 छात्राओं पर 31 शिक्षिकाएं विद्यालय पर तैनात है। वहीं, ग्रामीणांचल स्थित जीजीआईसी अंबारी में वर्तमान सत्र में एक हजार से अधिक छात्राएं हैं, लेकिन पढ़ाने वाली शिक्षिकाओं मात्र सात है। इस बाबत पूछे जाने पर माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी निदेशालय की ओर से नियुक्ति और ट्रांसफर-पोस्टिंग की ठीकरा फोड़ अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र स्थित अन्य राजकीय बालिका विद्यालयों की भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। किसी में मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती न होने से छात्राओं का काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। अभिभावकों का आरोप है कि उनके बच्चियों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
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राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती, ट्रांसफर आदि की कवायद पूरी तरह से निदेशालय से किया जाता है। डीआईओएस औरजेडी स्तर से कोई कवायद नहीं होती है। हम सिर्फ संबंधित विद्यालयों में रिक्तियों की सूचना आदि भी भेज सकते हैं। समय-समय पर ऐसी सूचना निदेशालय भेजी जाती है। डॉ. वीके शर्मा, डीआईओएस, आजमगढ़।
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