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बुलंद शहर की घटना भाजपा और बजरंगदल की सोची-समझी राजनीति

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सगड़ी। सरकार में रहकर सरकार का विरोध करने वाले दिव्यांग जनकल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर बुधवार को भाजपा पर काफी आक्रामक दिखे। बुलंद शहर घटना को उन्होंने भाजपा और बजरंग दल की सोची समझी राजनीति बताया। साथ ही सरकार पर लोगों को मंदिर मस्जिद के नाम पर लड़ाने का आरोप लगाया। वह बुधवार को सगड़ी तहसील क्षेत्र के चकअजीज गांव के लछिया बगीचे में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार मंदिर-मस्जिद में बांटकर लोगों को लड़ा रही है। इससे जनता का कोई भला होने वाला नहीं है। इसका जीता जागता उदाहरण बुलंद शहर की घटना है। जो बजरंग दल और भाजपा की सोची समझी साजिश थी क्योंकि मुसलमानों का सबसे बड़ा इज्तेमा होने वाला था। इसमें गरीब का बेटा और एक कोतवाल की मौत हो गई जो दुखद है। अब तक किसी नेता की मौत मंदिर बनाने के नाम पर हुए विवाद या बवाल में नहीं हुई। लोग कहते हैं कि ओमप्रकाश राजभर खुद सरकार में रहते हुए भी सरकार का विरोध कर रहा है। इसके बाद भी मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं। मंडल कमीशन को लागू हुए 28 साल हो गए पर अब तक सभी अति पिछड़ी, अति दलित जातियों को समान रूप से नौकरियों में भागीदारी नहीं मिली। राजनाथ सिंह ने पिछड़ी जातियों को तीन कैटेगरी में विभाजित किया था। हम न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और समिति की रिपोर्ट भी आ गई है जिस पर हम दबाव बना रहे हैं कि समिति की रिपोर्ट लागू हो। देश में नौ लाख मंदिर काशी विश्वनाथ जैसे हैं जिसमें पुजारी कुछ विशेष जाति के लोग हैं। पिछड़ी जाति के लोगों को मंदिर में पुजारी के तौर पर रखा जाए जिससे सबको रोजगार भी मिलेगा। भाजपा देश में विभाजन करवाना चाहती है जिससे वोट की रोटी सेंक सके। साथ ही वोट लेने के लिए हर प्रकार के हथकंडे अपना रही है। अयोध्या मुद्दा कोर्ट में विचाराधीन है तो उस पर राजनीति करने की क्या जरूरत है। जब तक शराबबंदी नहीं होगी हम प्रदेश सरकार से लड़ाई लड़ते रहेंगे। 72 वर्षों से एससी/एसटी को इंजीनियर, आईएएस, पीसीएस, डॉक्टर आदि की निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था सरकार कर रही है। उसी तरह से पिछड़ी और सामान्य जातियों को भी अलग से कोचिंग की व्यवस्था की जाए। इस मौके पर विजय यादव, उमेश राजभर, मु. आसिफ, राजवंत सिंह, चंद्रभान राजभर, सरोजनी यादव, उदयभान राजभर, जयनाथ सिंह, श्यामदेव राजभर, प्रभाकर जायसवाल आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता रामाशीष राजभर और संचालन बिच्छेलाल राजभर ने किया।
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