आजमगढ़। मंडल के तीन जनपदों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की धीमी प्रगति और मनरेगा की खराब रैंकिंग पर कमिश्नर जगत राज ने असंतोष जताया है। मंगलवार को समीक्षा बैठक में उन्होंने मुख्य विकास अधिकारियों को इसमें अपेक्षित प्रगति लाने का निर्देश दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में वर्ष 2016-17, 2017-18 और 2018-19 के कुल संशोधित लक्ष्य आजमगढ़ में 29227, मऊ में 13727 और बलिया में 23261 था। इसमें आजमगढ़ में 25573, मऊ में 11363 और बलिया में 17210 आवास पूरे हैं। समीक्षा में पाया गया कि लक्ष्य के सापेक्ष आजमगढ़ में 42 आवास स्वीकृति के लिए लंबित हैं। स्वीकृत आवासों के सापेक्ष आजमगढ़ में 3612, मऊ में 2387 और बलिया में 6060 आवास अधूरे हैं। आजमगढ़ में 35, मऊ में 108 और बलिया में 252 आवासों को प्रथम किस्त नहीं दी गई है। तीनों जनपदों में क्रमश: 1064, 1020 और 1828 आवासों की द्वितीय किस्त अवमुक्त नहीं की गई है। आजमगढ़ में 1929, मऊ में 997 और बलिया 3771 आवासों को अभी तक तृतीय किस्त अवमुक्त नहीं हुई। वहीं मनरेगा की समीक्षा में आजमगढ़ में लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 82 प्रतिशत, जनपद मऊ में मात्र 74 प्रतिशत मानव दिवस का सृजन किया गया हैं। ये राज्य औसत 89 प्रतिशत से कम है। इसके अतिरिक्त वर्तमान वित्तीय वर्ष में जनपद आजमगढ़ में विलम्बित भुगतान 17.87 प्रतिशत, बलिया में 22.10 प्रतिशत है। ये राज्य औसत 10.59 से बहुत अधिक है। इस प्रकार मानव दिवस सृजन में आजमगढ़ की रैंकिंग 50, मऊ की 66 है, जबकि विलंबित भुगतान में आजमगढ़ की रैंकिंग 66 और बलिया की 73 है। कमिश्नर ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में लक्ष्य के सापेक्ष उपलब्धि तत्काल सुनिश्चित कराते हुए वेबसाइट पर प्रगति विवरण अपलोड कराने का निर्देश दिया। इसके साथ ही मनरेगा योजना में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत मानव दिवस सृजन और विलम्बित भुगतान का प्रतिशत भी राज्य औसत के सापेक्ष लाने का निर्देश दिया है।