निजामाबाद। तहसील क्षेत्र के बागसेठ गांव में पेट्रोलपंप के सामने स्थित आठ बिस्वा 10 कड़ी बंजर जमीन को अभिलेखों में हेराफेरी कर बेचने की एक बार फिर शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी ने एसडीम को पैमाइश के निर्देश दिए। एसडीएम ने राजस्वकर्मियों को मौके पर भेजकर जमीन की पैमाइश कराई और जमीन को बंजर के खाते में दर्ज कराया।
निजामाबाद तहसील के बागसेठ गांव में सड़क किनारे स्थित बंजर की कीमती जमीन पर शहरिया गांव निवासी अबुल्लैस पुत्र मुनीर ने अभिलेखों में हेराफेरी कर अपना और संबंधियों का नाम दर्ज करा लिया था। इसके बाद उन्होंने उक्त जमीन को वर्ष 2016 में कप्तानगंज थाना क्षेत्र के बाजार निवासी शैलेंद्र चंद्र त्रिपाठी और दो-तीन लोगों को लगभग 50 लाख रुपये में बेच दिया था। पैसा लेकर अबुल्लैश किनारे हो गए, लेकिन रुपये को लेकर उसके संबंधियों ने तत्कालीन डीडीसी रितु सुहास के न्यायालय में मुकदमा कर दिया। डीडीसी ने जमीन पर नाम दर्ज करने के आदेश को खारिज कर दिया। इसके बाद भी आदेश की अभिलेखों में अमल दरामद नहीं की गई। दो माह पहले भी जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी कि जमीन पर अवैध रूप से प्लाटिंग की जा रही है। जिलाधिकारी ने एसडीएम को कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन कुछ हुई नहीं। बुधवार को जिलाधिकारी से फिर शिकायत की गई कि जमीन को बेचा जा रहा है। जिलाधिकारी ने शिकायत पर एसडीएम को जांच करने के निर्देश दिए। जांच के दौरान पुराने अभिलेखों में उक्त जमीन बंजर की पाई गई। एसडीएम ने उक्त मामले से जिलाधिकारी को अवगत कराया। जिलाधिकारी ने जमीन की पैमाइश करने का निर्देश दिया। इस पर एसडीएम निजामाबाद बागीश कुमार शुक्ला ने बुधवार को राजस्वकर्मियों को मौके पर पैमाइश के लिए भेजा। राजस्वकर्मियों ने जमीन की पैमाइश कर उसका सीमांकन किया। सीमांकन के बाद एसडीएम ने उक्त भूमि को बंजर खाते में दर्ज करा दिया। जमीन खरीदने वाले शैलेंद्र चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि जमीन खरीदने के समय जब इसकी नकल निकलवाई गई तो उस अबुल्लैश का नाम दर्ज था। इसे देखकर उन्होंने जमीन का बैनामा लिया।