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निलंबन आदेश में देरी, बचाने की तैयारी तो नहीं

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आजमगढ़। शासन के निर्देशों की अवहेलना और हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना में 20 जनवरी को निलंबित समाज कल्याण अधिकारी के निलंबन के आदेश आठ दिन बाद भी जनपद में नहीं पहुंच सके हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से आदेश मिलने से इंकार किया जा रहा है। वहीं, शिकायती पक्ष के पास निलंबन आदेश भी मौजूद है। पीड़ितों शिक्षकों का कहना है कि समाज कल्याण अधिकारी निलंबन के खिलाफ कोर्ट से राहत लेने की फिराक में हैं। उच्च अधिकारियों की ओर से भी उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है, इसलिए उनका निलंबन आदेश अभी तक जनपद के अधिकारियों तक नहीं पहुंचा है।लंगड़पुर स्थिति महादेवी बाल विद्यालय के साथ शिक्षकों दूधनाथ राम, रामकेर राम, बरखू राम, चंद्रभूषण, अशोक कुमार, महेंद्र राय, राजनाथ यादव का वेतन वर्ष 2005 में नियुक्ति को अनियमित बताते हुए रोक दिया गया था। ये शिक्षक हाईकोर्ट चले गए थे। कोर्ट के आदेश के बाद भी वेतन जारी नहीं करने पर अवमानना में हाईकोर्ट ने डायरेक्टर समाज कल्याण को दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए एक सप्ताह के भीतर अगत कराने का निर्देश दे दिया गया। प्रमुख सचिव मनोज सिंह ने मामले में 20 जनवरी को समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह को निलंबित कर दिया था। आठ दिन बीतने के बाद भी निलंबन आदेश जनपद में नहीं पहुंचने और स्थानीय अधिकारियों की ओर से इसके न मिलने की बात कहने पर पीड़ित शिक्षकों ने अब इस पर अंगुली उठानी शुरू कर दी है। लंगड़पुर स्थिति महादेवी बाल विद्यालय प्रधानाध्यापक दूधनाथ राम ने बताया कि समाज कल्याण अधिकारी निलंबन के खिलाफ कोर्ट से राहत लेने की फिराक में हैं। लेकिन अपने ऊपर लगे आरोपों के कारण ये संभव नहीं है। वो अभी एक-दो दिन आफिस में कार्य कर कोर्ट के आदेश के क्रम में कुछ सुधार करने की फिराक में हैं। आरोप लगाया कि उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से निलंबन आदेश भेजने में देरी की जा रही है। ताकि समाज कल्याण अधिकारी यहां इसका लाभ ले लें और हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिल जाए। शिक्षक नेता हंसराज ने बताया कि अधिकारियों की इस चाल को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
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