लाटघाट। स्वास्थ्य महकमा कब सुधरेगा यह समझ में नहीं आ रहा है। आए दिन डॉक्टरों की लापरवाही सामने आ रही है, इसके बाद भी विभाग व्यवस्था में सुधार की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। सीएचसी हरैया पर बुधवार को सात महिलाओं की नसबंदी आपरेशन किया गया। आपरेशन के बाद डॉक्टर साहब महिलाओं को कराहते हुए छोड़ कर चलते बने। आशा बहुओं ने महिलाओं को इंजेक्शन लगाया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरैया पर बुधवार को नसबंदी कैंप का आयोजन था। जिसमें सात महिलाओं की नसबंदी की गई। क्षेत्र के गांगेपुर, हाजीपुर, बघावर, रैचनपट्टी, सोनौरा, जोकहरा आदि ग्रामों से आशा बहुएं एक-एक महिलाओं को नसबंदी के लिए सीएचसी पर लेकर पहुंची थी। दोपहर बाद डॉक्टर ने इन महिलाओं की नसबंदी की और फिर उन्हें कराहता हुआ छोड़ कर चले गए। अस्पताल में इन महिलाओं को कायदे ने बेड भी उपलब्ध नहीं कराया गया। एक ही बेड पर जहां दो-दो आपरेशन कराने वाले महिलाओं को लिटाया गया था तो वहीं इन बेडो पर चादर भी नहीं बिछाया गया था। आपरेशन के बाद महिलाए कराह रही थी, लेकिन डॉक्टर मौजूद नहीं थे। उन्हें लेकर आने वाली आशा बहुएं इन्हें इंजेक्शन आदि लगा रही थी। आपरेशन के बाद दवा आदि देने की सारी जिम्मेदारी डॉक्टर के बजाए आशा बहुओं के ही जिम्मे रही। सीएचसी के स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी लाल जी यादव ने बताया कि नसबंदी कराने वाली महिला को प्रोत्साहन राश् िके रूप में दो हजार रुपये व आशा बहू को 300 रुपये शासन से प्रदान किया जाता है। यह धनराशि दोनों के खाते में सीधे जाती है। वहीं अस्पताल में व्याप्त दुर्व्यवस्थाओं के बाबत उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। महिलाओं के साथ आए तीमारदारों का कहना था कि अस्पताल पर सिर्फ नि:शुल्क आपरेशन ही हुआ है। दवा-इंजेक्शन के साथ ही चाय-नाश्ता आदि की व्यवस्था उन्हें स्वयं करना पड़ा है। आपरेशन के बाद महिलाओं के लिए बेड का भी समुचित प्रबंधक अस्पताल प्रशासन ने नहीं किया था।
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यदि ऐसा है तो यह गलत है। आपरेशन करने वाले डॉक्टर के साथ ही सीएचसी पर तैनात अन्य डॉक्टरों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि ठंड के इस मौसम में नसबंदी कराने आने वाली महिलाओं को पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। शिकायत की जांच करा कर संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एसके तिवारी, सीएमओ, आजमगढ़।