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आजमगढ़। शिब्ली नेशनल कॉलेज में चल रहे 18वें आजमगढ़ पुस्तक मेले में सोमवार को सर सैयद अहमद खां के विचारों की समकालीन समय में प्रासंगिकता विषय पर विचार-विमर्श हुआ।
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विचार विमर्श में अर्थशास्त्र विभाग के मोे. खालिद ने कहा कि सर सैयद अहमद खां ने 1857 से पहले का भारत और 1857 के बाद का हताश भारत भी देखा था। आजादी के स्वप्न को साकार करने और नये भारत के निर्माण के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण है। उर्दू विभाग के अध्यक्ष डा. शबाबुद्दीन ने कहा कि सर सैयद अहमद नेे बताया कि हिंदुस्तान उस खूबसूरत दुल्हन की तरह है, जिसकी हिंदू और मुसलमान दो आंखें हैं। सर सैयद की राह पर चलते हुए अल्लामा शिब्ली ने आजमगढ़ में और आल्ताफ हुसैन हाली ने पानीपत में ज्ञान की पाठशाला स्थापित की। शिब्ली एकेडमी के सीनियर फेलो मौलाना उमेेर सिद्दकी ने कहा कि सर सैयद हर सामाजिक एवं साहित्यिक सरोकारों को गंभीरता से महसूस करते थे। जिला विद्यालय निरीक्षक वीके शर्मा ने कहा कि पुस्तक मेला वैश्विक मंच का निर्माण करता है। यहां किताबों के माध्यम से पूरी दुनिया का ज्ञान-विज्ञान ज्ञान के मंदिरों में प्रवाहित होता है। डा. रविन्द्र नाथ राय ने कहा कि आज का विमर्श गंगा यमुनी एकता को समझने का विमर्श था। डा. अल्ताफ अहमद, डा. हकीमउद्दीन , डा. निशाद परवीन, अबू राफे, उत्पला अधिकारी, सीमा भारती उपस्थित थे। वहीं, नाट्य लेखन शिविर की निदेशक रीता रंजन ने बताया कि कार्यशाला में विभिन्न थीम के अंतर्गत नाट्य रचना की गई। गराजीव रंजन ने बताया कि पुस्तक मेले का समापन मंगलवार को होगा। आखिरी दिन परंपराशील नाट्य स्रोतों के प्रवर्तक एवं साहित्य निर्माता जगदीश चन्द्र माथुर के रचनाकर्म को समर्पित रहेगा। मुख्य अतिथि के रूप में स्व. जगदीश चन्द्र माथुर के पुत्र हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईएएस समीर माथुर उपस्थित रहेंगे।
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