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Azamgarh News: 1. 67 लाख हेक्टेयर में रोपाई का लक्ष्य, नर्सरी डालने के लिए नहरों में पानी ही नहीं

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पवई क्षेत्र की शारदा सहायक खंड 32 में पानी नहीं। संवाद
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आजमगढ़। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नहरों का जाल बिछा है, लेकिन वर्तमान में नहरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। यह स्थिति तब है जब किसान धान की नर्सरी डालने में जुटे हैं। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग ने इस वर्ष 1.67 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा है। जिले में शारदा सहायक खंड 32, खंड 23 सहित अन्य नहरों की संख्या 363 से अधिक है। इसके माध्यम से जिले में 1.72 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती है। वर्तमान समय में धान की नर्सरी और संडा रोपने का पीक समय चल रहा है, लेकिन नहरों से पानी गाय। इससे किसान परेशान हैं। मेंहनगर, देवगांव, फूलपुर, निजामाबाद, कप्तानगंज, सगड़ी, रानी की सराय, अहरौला किसी भी क्षेत्र में पानी नहीं है। इससे किसान परेशान हैं। किसान हेमंत तिवारी, पंकज राय, घनश्याम सिंह ने बताया कि दिन में बिजली कटौती और नहरों में पानी न आने से डीजल फूंककर धान की नर्सरी डालने को मजबूर हैं। जरूरत पर नहरों में पानी नहीं रहता है।
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बरदह:
जौनपुर से निकलकर गाजीपुर तक जाने वाली खंड-23 मेहरावा नहर में पानी न आने से लगभग 250 गांवों की किसानों की चिंता बढ़ गई है। पानी न आने से धान की नर्सरी प्रभावित हो रही है। जनार्दन सिंह, बबलू ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश सरकारी नलकूप भी खराब पड़े हैं।
पवई: शारदा सहायक खंड- 32 के किसी भी नहर में पानी नहीं आ रहा है। इससे क्षेत्र के बेलवाई, जमुहट, प्रतापपुर, भीमलपुर, लग्गूपुर, मैगना खेमीपुर सहित दर्जनों गांव के किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि जून माह में धान की नर्सरी डालने का सबसे उपयुक्त समय होता है, लेकिन नहरें सूखी पड़ी हैं।
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सूखने के कगार पर गन्ना, मक्का की फसल
अंबारी। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच नहरों में पानी न आने से गन्ना, मक्का, बाजरा, सब्जियों, खरबूज की फसलें प्रभावित हो रही हैं। गर्म हवाओं के कारण खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिससे फसलों के सूखने का खतरा बढ़ गया है। नहर में पानी न आने से धान की नर्सरी तैयार करने का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। संवाद


नहर में पानी न आने के कारण किसानों को निजी नलकूपों और डीजल पंपों के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है। जिन किसानों के पास निजी सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, वे सबसे अधिक परेशान हैं। - किसान अरविंद राय, मैगना


हर बार धान की खेती के समय सिंचाई विभाग लापरवाही करता है। जरूरत के समय नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता है। इससे किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती है। अगर जल्द नहरों में पानी नहीं आया तो धान की खेती प्रभावित होगी। - किसान नंदन सिंह, प्रतापपुर

पिछले महीने नहर में पानी छोड़ा गया था। इस समय सभी नहरें बंद हैं। अब 25 जून के बाद ही नहरों में पानी आएगा। - हर्षेंद्र गुप्ता, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग।
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