अयोध्या। एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करिश्मा सामने आया है। मिल्कीपुर उप चुनाव में सिपहसलारों की मदद से भाजपा को भारी मतों से जिताकर योगी ने कुशल संगठनकर्ता होना साबित किया है। पूरे उप चुनाव में पीडीए बेअसर दिखा। न तो पिछड़ा, न दलित और न ही अल्पसंख्यक मतों को सहेजने में कामयाबी मिली।
टीम योगी ने राम मंदिर निर्माण के बाद भी फैजाबाद लोकसभा सीट हारने की टीस को मिटाने में कामयाबी पाई है। जितने अंतर से लोकसभा सीट पर हार हुई थी, उससे अधिक अंतर से उप चुनाव जीतने का संकल्प भी पूरा करने में सफलता मिली है। यदि परिणामों पर नजर डाली जाए तो पहले चक्र की मतगणना से भाजपा ने जो बढ़त बनाई तो वह फिर रुकी नहीं। फैजाबाद लोकसभा सीट पर राम मंदिर निर्माण के बाद भी भाजपा की हार की टीस मिल्कीपुर के आम मतदाताओं तक पहुंचाने की रणनीति में भाजपा को सफलता मिली। पार्टी के रणनीतिकारों की ओर से इस मुद्दे को भुनाने की भरपूर कोशिश की गई और इसमें सफलता भी मिली।
जानकार बताते हैं कि सपा के कोर वोट बैंक पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक के मतों में सेंध लगाने की भाजपा की रणनीति काम आई और इनके मतों में बिखराव कर अपने पक्ष में भी वोट डलवाने में सफल रही। यादव के साथ ही कोरी, पासी तथा अन्य पिछड़े वर्ग के मतों को भी भाजपा ने अपने पक्ष में किया। इसके साथ ही ब्राह्मण समाज के क्षत्रप इस समाज को भी अपने पाले में करने में सफल रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को मिले मतों को भी सहेजने में पार्टी कामयाब नहीं हो पाई। यही वजह है कि पिछले चुनाव से लगभग 19 हजार कम वोट सपा प्रत्याशी व सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजित प्रसाद को मिले।
भाजपा ने बसपा के वोट बैंक में भी सेंध लगाने में सफल रही है। कारण उप चुनाव में बसपा प्रत्याशी मैदान में नहीं था। 2022 के चुनाव में बसपा को 14427 मत मिले थे। माना जा रहा है कि पार्टी का कोर वोट बैंक भाजपा के साथ गया है। साथ ही सपा के मतों के बिखराव की वजह से भाजपा को 1.46 लाख तक मत मिले।
भाजपा को दशक में न केवल सबसे अधिक मत मिले, बल्कि सबसे बड़ी जीत दर्ज करने में कामयाबी मिली। यदि 2002 से पिछले सात चुनावों की बात की जाए तो 2022 में सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद को 103905 वोट मिले थे, लेकिन 2025 के उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी चंद्रभानु पासवान को 146397 मत मिले। यदि जीत का अंतर देखा जाए तो 2004 के उप चुनाव में सपा ने बसपा से 35018 (21.55 फीसदी) के अंतर से चुनाव जीता था। मौजूदा चुनाव में भाजपा ने अवधेश प्रसाद के एक लाख से अधिक के आंकड़े को पार करते हुए 146397 मत हासिल किए। जीत का अंतर 61710 (25.50) रहा। इस प्रकार भाजपा ने दो दशक में सबसे अधिक मत मिलने और सबसे बड़ी जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड बनाया।