36- विश्व मांगल्य सभा की ओर से आयोजित पथ संचलन में शामिल मातृशक्तियां- संवाद
अयोध्या। विश्व मांगल्य सभा की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का रविवार को समापन हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित मातृ शक्तियों ने अनुशासन, शौर्य और आत्मविश्वास का ऐसा संदेश दिया, जिसने नगरवासियों को भावविभोर कर दिया। पथ संचलन में कदमताल करती मातृ शक्तियां जब नगर के प्रमुख मार्गों से गुज़रीं, तो वातावरण देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत हो उठा।
एकरूप चाल और संयमित पंक्तियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि मातृशक्ति केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाने को सदैव तत्पर है। श्रीरामबल्लभाकुंज से लता चौक, रामपथ होते हुए महिलाओं ने हाथ में भगवा ध्वज लेकर राम मंदिर के प्रवेश द्वार तक पथ संचलन किया। सभी महिलाओं ने रामलला के दरबार में भी हाजिरी लगाई। राम मंदिर में सामूहिक रूप से रामरक्षास्त्रोत का पाठ किया। सम्मेलन के समापन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि मातृ शक्तियों का यह संगठित स्वरूप समाज को दिशा देने वाला है। संस्कार, सेवा और सुरक्षा इन तीनों आयामों में मातृशक्ति की भूमिका को सशक्त करना ही विश्व मांगल्य सभा का मूल उद्देश्य है।
सम्मेलन के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर मंथन किया गया। पथ संचलन में राष्ट्रीय मार्गदर्शक विश्व मांग्लय सभा प्रशांत हलतालकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष रेखा देवी खंडेलवाल, डॉ. वृषाली जोशी, प्रियंका शुक्ला, विनीता पांडेय, प्रशांत दामोदर भटनागर सहित सैकड़ों की संख्या में विभिन्न प्रांतों से आईं महिलाएं शामिल रहीं।