महिलाओं को मशरूम की खेती की जानकारी देते प्रशिक्षक- संवाद
अयोध्या। रामनगरी की महिलाएं अब केवल घर की चारदीवारी या पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह आधुनिक और व्यावसायिक खेती के जरिए आर्थिक आजादी की नई पटकथा लिख रही हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय के मार्गदर्शन में संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त कर 35 महिलाओं के एक समूह ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में कदम बढ़ाया है। संस्थान की ओर से 10 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में महिलाओं को बटन और ढींगरी (ऑयस्टर) मशरूम की खेती, उसके रखरखाव और व्यावसायिक उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने महिलाओं को बताया कि बटन मशरूम का उपयोग मुख्य रूप से सब्जी के रूप में किया जाता है। यह आम तौर पर सब्जी के ठेलों और बाजारों में आसानी से उपलब्ध होता है। यह करीब 200 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकता है। वहीं, ढींगरी मशरूम का उपयोग विशेष तौर पर औषधीय में किया जाता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, जिससे इसका पाउडर बाजार में लगभग 1800 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। ऐसे में ढींगरी और बटन मशरूम की खेती महिलाओं के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती है।
मशरूम की खेती का प्रशिक्षण ले चुकी पूरा बाजार ब्लॉक के महेशपुर गांव की रहने वाली रेशमती वर्मा ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से उन्हें न केवल नई तकनीक सीखने का अवसर मिल रहा है, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत बनने का भी रास्ता खुल रहा है।
संस्थान के निदेशक पुरुषोत्तम कश्यप ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। महिलाओं को पारंपरिक खेती के अलावा व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती कम लागत, कम जगह और कम समय में बेहतर मुनाफा देने वाला व्यवसाय है। जिसे महिलाएं अपने घर पर छोटी सी जगह पर इसकी खेती शुरू कर सकती हैं, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वावलंबी बन सकेंगी। कहा कि आने वाले समय में ये महिलाएं स्वयं का व्यवसाय शुरू कर परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनेंगी।