अयोध्या। साकेतपुरी स्थित निर्मला अस्पताल की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। अब एक मरीज के स्वजन ने इमरजेंसी में डायलिसिस न होने से महिला की मौत का आरोप लगाया है। मामले में उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल के निर्देश पर सीएमओ ने जांच शुरू कराई है।
मेडिकल काउंसिल को दिए शिकायती पत्र में अयोध्या धाम निवासी अजीत चौरसिया ने बताया कि उनकी मां राधा देवी की लंबे समय से डायलिसिस होती थी। 14 अगस्त की रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ और उच्च रक्तचाप हो गया। उन्हें निर्मला अस्पताल की आईसीयू में भर्ती कराया गया। वहां उनकी खून जांच में हीमोग्लोबिन 4.8, यूरिया 98.63, क्रिएटिनिन 2.68, पोटेशियम 2.8 व कैल्शियम 6.8 बताया गया।
यह आंकड़े उनकी पिछली चिकित्सा स्थिति से मेल नहीं खाते थे। रिपोर्टों की दोबारा जांच करने के लिए अनुरोध किया गया, लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने न तो जांच कराई न ही उनकी इमरजेंसी डायलिसिस की। बल्कि, बार-बार खून चढ़वाने पर जोर देने लगे। बगैर डायलिसिस के उनकी मां को रात भर कष्ट सहना पड़ा। वहीं, निर्मला अस्पताल की तैयार की गई एबीजी रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन का अनुमानित स्तर लगभग 7.75 ग्राम दर्शाया गया।
15 अगस्त की सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने एक यूनिट रक्त की व्यवस्था की और डायलिसिस का अनुरोध किया। उनकी हालत लगातार बिगड़ने के कारण वह मरीज लेकर लखनऊ के निजी अस्पताल चले गए। वहां उनकी खून जांच दोहराई गई तो उसकी रिपोर्ट निर्मला अस्पताल की रिपोर्ट से काफी भिन्न आई। इससे स्पष्ट हुआ कि निर्मला अस्पताल में तैयार की गई रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण थी या उनकी गलत व्याख्या की गई थी। इस बीच लखनऊ में इलाज के दौरान उनकी मां की मौत हो गई।
उन्होंने आरोपी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत का संज्ञान लेकर उ.प्र. मेडिकल कौंसिल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने नौ जनवरी को सीएमओ को पत्र लिखकर जांच का आदेश दिया है। जांच के बाद कृत कार्यवाही से शिकायतकर्ता और कौंसिल को अवगत कराने का निर्देश दिया गया है।
सीएमओ डॉ. देवेंद्र कुमार भिटौरिया ने बताया कि एसीएमओ आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में श्रीराम अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राम किशोर और पैथोलॉजिस्ट डॉ. अशोक यादव मामले की जांच कर रहे हैं। वहीं, निर्मला अस्पताल के संचालक डॉ. आरके बनौधा ने बताया कि महिला की हालत गंभीर थी। जांच में खून की मात्रा कम आई थी, इसलिए उस समय डायलिसिस हो पाना संभव नहीं था।