मिल्कीपुर। प्राथमिक विद्यालय मिचकुरही का कंपोजिट विद्यालय महुलारा व प्राथमिक विद्यालय मठिया का कंपोजिट विद्यालय गोकुला में विलय किए जाने से छात्र-छात्राओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विद्यालय पहुंचने के लिए बच्चे पहले जहां 500 मीटर की दूरी तय करते थे, वहीं अब उन्हें ढाई किलोमीटर दूर चलना पड़ रहा है। दूरी अधिक होने से छात्र संख्या लगातार कम हो रही है। प्राथमिक विद्यालय मठिया के 30 जून को विलय होने के बाद छात्र संख्या घटकर 32 से 22 रह गई है।
बुधवार को कंपोजिट विद्यालय महुलारा में विलय किए गए प्राथमिक विद्यालय मिचकुरही के 11 छात्र-छात्राओं में मात्र चार बच्चे ही स्कूल पहुंचे। वह भी शिक्षिका पूनम मिश्र के बार बार बुलाने पर। कंपोजिट विद्यालय गोकुला में विलय किए गए प्राथमिक विद्यालय मठिया के 22 बच्चों के सापेक्ष 17 बच्चों ने विद्यालय आना शुरू किया। बुधवार को 11 बच्चे ही विद्यालय पहुंचे। विलय किए गए इन दोनों विद्यालयों में पहुंचने के लिए छोटे-छोटे बच्चों को अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। रास्ते पर मात्र खड़ंजा ही लगा है। उस पर कीचड़ जमा रहता है।
प्राथमिक विद्यालय मिचकुरही में पढ़ाई कर रहे छात्र फरहान की मां तहरुन्निशा ने बताया कि अब बेटे का स्कूल महुलारा हो गया है। दूरी दो किलोमीटर से ज्यादा हो गई है। समय पर स्कूल पहुंचाने व छुट्टी होने पर वापस लाने जाना पड़ता है। गांव का स्कूल बंद होने से जिम्मेदारी बढ़ गई है। अभिभावक राजू श्रीवास्तव का कहना है कि दूरी अधिक होने से बच्चे को विद्यालय आने जाने में कठिनाई होती है। जिस दिन गांव के अन्य बच्चों का साथ मिल जाता है, उस दिन तो चला जाता है नही तो स्कूल छोड़ने जाना पड़ता है।
अभिभावक सुशीला व रामलली का कहना है कि दूरी अधिक होने से बच्चों को आने जाने में समस्या हो रही थी। इसके चलते पास के निजी स्कूल में भेजना पड़ रहा है। पहले विद्यालय नजदीक था कोई परेशानी नहीं होती थी। कंपोजिट विद्यालय गोकुला के प्रधानाध्यापक विवेक पांडेय ने बताया की प्राथमिक विद्यालय मठिया के शिक्षकों के साथ लगातार अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। उन्हें बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
प्राथमिक विद्यालय मिचकुरही में ही आंगन केंद्र महुलारा तृतीय का संचालन होता था। केंद्र पर 3-6 आयु वर्ग के 25 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय बंद होने से केंद्र के संचालन पर संकट है। कार्यकर्ता राजकुमारी ने बताया कि गांव में अन्य कोई सार्वजनिक स्थान नही है। एक मंदिर है उसी के पास पेड़ के नीचे बच्चों को बैठाना पड़ रहा है। हाईवे पार करके आना पड़ता है।
खंड शिक्षा अधिकारी अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि विलय का प्रस्ताव भेजते समय छात्र-छात्राओं के हितों को ध्यान में रखा गया है। ऐसे विद्यालयों को विलय सूची में नही रखा गया है जिनके बच्चों को हाईवे पार करना पड़े। दूरी अधिक हो या फिर रास्ता जलभराव जैसा हो। ऐसे ही अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव दिया गया था। चार विद्यालयों का विलय हो चुका है। शेष के विलय की सूची अनुमोदन के लिए भेजी गई है।