अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में ट्रस्ट और सुरक्षा एजेंसियों की घोर लापरवाही बड़ी वजह रही है। मंदिर के किसी भाग में ट्रस्ट कर्मियों की बेरोकटोक आवाजाही थी। परिसर में प्रवेश और बाहर निकलने के दौरान किसी की तलाशी नहीं होती थी। इसी का फायदा उठाकर चढ़ावे की रकम लंबे समय तक बाहर जाती रही।
सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर की सुरक्षा में विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ निजी सुरक्षा एजेंसी के जवान भी तैनात हैं। परिसर में प्रवेश के समय आम श्रद्धालुओं की कई स्तरों पर जांच होती थी, लेकिन ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों को पहचान और नियमित आवाजाही के कारण सीधे अंदर जाने और बाहर निकलने की छूट थी।
ड्यूटी पूरी होने के बाद कर्मचारियों की तलाशी नहीं होती थी। यही वजह रही कि उन पर सुरक्षा कर्मियों का संदेह भी नहीं जाता था और वे बिना किसी रोक-टोक के परिसर से बाहर निकल जाते थे। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि इसी बड़ी खामी की आड़ में चढ़ावे की रकम पार की जाती थी।
इनसेट
ट्रस्ट कर्मियों की थी हनक, नतमस्तक थे सुरक्षाकर्मी
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट कर्मियों का प्रभाव भी सुरक्षा व्यवस्था पर साफ दिखाई देता था। सुरक्षा में तैनात जवान उनके साथ सामान्य औपचारिक व्यवहार करते थे और तलाशी की प्रक्रिया लागू नहीं करते थे। चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की हनक सर्वाधिक थी। वह मंदिर के किसी भी गेट से बेधड़क प्रवेश करता था। परिसर में भी बाइक से घूमता था। उसका हर आदेश लोग चंपत राय का आदेश समझकर सिर माथे लगाते थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि यह केवल व्यवस्था की चूक थी या इसके पीछे किसी स्तर पर मिलीभगत भी थी। वहीं, चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था की पूरी कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा रही है। संभावना है कि आगे ट्रस्ट कर्मचारियों के लिए भी आम लोगों की तरह अनिवार्य तलाशी और सख्त प्रवेश-निकास प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे।
इनसेट
चंपत राय ने खड़े किए हाथ तो टिन्नू ने दिलाई मिट्टी
सूत्रों के अनुसार टिन्नू की हनक चंपत राय से ज्यादा हो गई थी। एक मंदिर के निर्माण में एक व्यक्ति ने रामजन्मभूमि की मिट्टी की आवश्यकता बताई। इसके लिए उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से इन्कार कर दिया। फिर उन्होंने टिन्नू से संपर्क साधा तो एक बोरी मिट्टी उनके घर तक पहुंचा दी गई। इसी से उसके रसूख का अंदाजा लगाया जा सकता है।