अयोध्या। मेडिकल कॉलेज के संविदा लिपिक प्रभुनाथ मिश्रा आत्महत्या प्रकरण में पूर्व प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। डीएम ने चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई) को पत्र भेजकर उनके विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति देने की मांग की है। अभियोजन स्वीकृति मिलने पर अदालत में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
जिलाधिकारी की ओर से जारी पत्र के अनुसार, कोतवाली अयोध्या में दर्ज एफआईआर में डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार नामजद आरोपी हैं। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अयोध्या ने 30 मार्च को पत्र भेजकर अभियोजन स्वीकृति की संस्तुति की थी। उसी पत्र का हवाला देते हुए डीएम ने पूरा प्रकरण डीजीएमई को भेज दिया है। पत्र में कहा गया है कि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार घटना के समय मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य थे। उनके खिलाफ सक्षम न्यायालय में अभियोजन चलाने के लिए आवश्यक स्वीकृति प्रदान किए जाने के संबंध में कार्रवाई अपेक्षित है। इसके साथ एसएसपी का मूल पत्र भी संलग्न कर भेजा गया है।
यह है अभियोजन स्वीकृति
सरकारी अधिकारी के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने से पहले सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है, जिसे अभियोजन स्वीकृति कहा जाता है। डीजीएमई की ओर से स्वीकृति मिलने के बाद पुलिस न्यायालय में आरोपी के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ा सकेगी।
यह था मामला
प्रभुनाथ मिश्रा मेडिकल कॉलेज संविदाकर्मी के रूप में तैनात थे। 29 जुलाई की सुबह 11:30 बजे परचा काउंटर पर उनकी ड्यूटी थी। इस दौरान एमबीबीएस के 2020 बैच की छात्राओं से उनका विवाद हो गया। कुछ देर बाद काफी संख्या में आए एमबीबीएस के छात्रों ने परचा काउंटर पर हंगामा काटा। आरोप है कि उन लोगों ने प्रभुनाथ की पिटाई भी की। सात अगस्त को प्रभुनाथ ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। परिजन उन्हें मेडिकल कॉलेज दर्शननगर लाए, जहां से लखनऊ रेफर कर दिया गया। अगले दिन उनकी मौत हो गई।
न्यायालय के आदेश पर सात नवंबर, 2024 को तत्कालीन प्राचार्य व दो छात्राओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई। एफआईआर में परिजनों ने बताया कि विपक्षियों ने उनके बेटे की शिकायत वापस लेने व माफी मांगने के लिए लगातार धमकाया। इसकी शिकायत प्राचार्य से की गई तो उन्होंने भी उसे अपने कमरे में बुलाकर भला-बुरा कहा। प्रभुनाथ को आरोपी छात्राओं का पैर पकड़कर माफी मांगने के लिए विवश किया गया। ऐसा न करने पर छेड़छाड़ व अन्य गंभीर अपराध में फर्जी फंसाने की धमकी दी गई। इसी से आहत होकर प्रभुनाथ ने आत्महत्या कर ली। परिजनों को उन्होंने यह जानकारी दी थी।