अयोध्या। नदी किनारे खेती करने वाले मंशाराम की गोली मारकर हत्या करने के मामले में फैसला आया है। अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ प्रतिभा नारायण ने सोमवार को दो अभियुक्तों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। महेश वर्मा और रमेश कुमार को हत्या तथा सबूत छिपाने के अपराध में दोषी ठहराया गया है। उन्हें अपहरण के आरोप से बरी कर दिया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना वर्ष 2020 में थाना महाराजगंज क्षेत्र के राजेपुर माझा की है। हथिलाही गांव निवासी मंशाराम दो साल से राजेपुर माझा में छप्पर रखकर खेती कर रहा था। गोसाईगंज क्षेत्र से महेश वर्मा गेहूं की कटाई के लिए आया था।
14 मई 2020 को गणेश यादव ने मंशाराम के बेटे गोलू को बताया कि उसके पिता दो दिन से नहीं दिख रहे हैं। इसके बाद 15 मई को गोलू ने पूरा बाजार चौकी में प्रार्थना पत्र दिया। इसके आधार पर महेश वर्मा के विरुद्ध अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की गई। न्यायाधीश ने दोनों अभियुक्तों पर 22-22 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।
हत्या का खुलासा और शव की बरामदगी
मंशाराम के अपहरण के मामले में महेश वर्मा को 17 मई को पुलिस चौकी पूरा बाजार लाया गया। पूछताछ में उसने मंशाराम की बंदूक से गोली मारकर हत्या करने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि शव को जमीन में गाड़ दिया गया है।
महेश के खुलासे पर रमेश कुमार निषाद को गिरफ्तार किया गया। माझा क्षेत्र में नदी किनारे जमीन की खोदाई कर शव को निकाला गया। शव के हाथों, पैरों और गले में रस्सी बंधी थी गोलू ने उसकी पहचान मंशाराम के रूप में की।
आयुध अधिनियम में महेश को सजा
महेश की निशानदेही पर उसके घर के सामने जमीन में गाड़ी गई बंदूक बरामद की गई। यह बंदूक हत्या में इस्तेमाल की गई थी। आरोपी महेश के विरुद्ध आयुध अधिनियम में अलग से रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
न्यायाधीश ने सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर महेश को दोषी पाया। उसे आयुध अधिनियम के उल्लंघन में तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इस पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
विवेचना के दौरान अर्जुन निषाद और बृजेश का नाम भी सामने आया। बृजेश को किशोर अपचारी होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड भेजा गया। मामले की विवेचना के बाद महेश वर्मा, रमेश कुमार निषाद और अर्जुन निषाद के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष से 12 गवाह पेश किए गए। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में बंदूक की नाल से फायरिंग के अवशेष मिले। न्यायाधीश ने सबूतों के आधार पर महेश वर्मा और रमेश कुमार निषाद को दोषी पाया, जबकि अर्जुन निषाद को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया।