अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के श्रीराम शोध पीठ में व्यवसाय प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को समापन हुआ। समापन सत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और आधुनिक प्रबंधन के समन्वय पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। 25 शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र भी प्रस्तुत किए।
प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। सफल प्रबंधन के लिए नैतिकता, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों को समान महत्व देना होगा। लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. रितु नारंग ने प्रबंधकीय नैतिकता पर व्याख्यान देते हुए कहा कि किसी भी संगठन की दीर्घकालिक सफलता उसके नैतिक आचरण, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व पर निर्भर करती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रबंधन के दौर में निष्पक्ष एवं जवाबदेह निर्णय पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
विशिष्ट वक्ता प्रो. अजय प्रकाश ने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित नेतृत्व, संसाधन प्रबंधन और सुशासन के सिद्धांत आज भी आधुनिक प्रबंधन के लिए प्रासंगिक हैं। वाणिज्य संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा ने संगोष्ठी को विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राकेश कुमार ने किया।