रामनगरी का विहंगम दृश्य। -फाइल फोटो
अयोध्या। रामनगरी की लुप्तप्राय प्राचीन कला व्यंजनों को सहेजने की मुहिम शासन की ओर से शुरू कर दी गई है। इसके लिए जिला स्तर पर प्राचीन कला व व्यंजनों को खोजकर उन्हें फिर से पुनर्जीवित किए जाने की योजना है। इसके लिए शासन स्तर पर से पांच लाख की सब्सिडी भी दी जाएगी। प्राचीन कला व व्यंजनों के सामने आने के बाद इनका प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, अयोध्या आने वाले पर्यटक भी इनसे रू-ब-रू हो सकेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में कला व व्यंजनों की विविधताएं हैं, इनमें से अधिकांश आधुनिकता के चलते लुप्तप्राय होती जा रही हैं। खानपान के साथ ही संस्कृति और संस्कार से जुड़े ऐसे तमाम उत्पाद हैं, जिन पर प्लास्टिक के साथ बाजार प्रभावी हो गया। अब इन्हें नए सिरे से पुनर्जीवित करने की तैयारी चल रही है। योजना के तहत लुप्त हुई कला और व्यंजन को तलाश कर सहेजा जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति या समूह इसे लेकर आता है तो उसे कारोबार के लिए शर्तों के अधीन पांच लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी। पैसा देने से पहले जिले स्तर पर डीएम, पर्यटन और संस्कृति परिषद की ओर से अनुमति ली जाएगी। जिले और मंडल स्तर पर उस व्यंजन, कला की सूची प्रकाशित की जाएगी। जिले में होने वाले समारोह में उसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा
पर्यटन अधिकारी राजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि गांवों की खंजड़ी, देशी डमरू, देशी ढोलक, बांसुरी वादन जैसी विधा को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही गांव में बनने वाले व्यंजन फरा, सहिंदा, हांडी की लाल दही भी लुप्तप्राय है। इन व्यंजनों को प्रचारित-प्रसारित किया जाएगा। सरकार की योजना के तहत इन्हें सामने लाया जाएगा। इसके जरिए अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को अवध की व्यंजन, कला, संस्कृति से परिचित कराया जाएगा।