भेलसर। पुनर्वास के तहत आवासीय भूमि मिलने के बावजूद सरकारी खलिहान की भूमि पर कब्जा बनाए रखने के मामले में जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने रुदौली तहसील के कूढ़ासादात गांव निवासी रियाज अहमद की अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया है। जिलाधिकारी ने तहसीलदार के पारित बेदखली आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर निजी कब्जा अस्वीकार्य बताया गया।
यह मामला ग्राम कूढ़ासादात के गाटा संख्या-420 से संबंधित है, जो राजस्व अभिलेखों में खलिहान के रूप में दर्ज है। यह भूमि करीब 0.008 हेक्टेयर है। रियाज अहमद ने अपनी अपील में कहा था कि उसका परिवार जमींदारी उन्मूलन से पहले से वहां निवास कर रहा है। उसने खुद को पूर्ण दिव्यांग बताते हुए वैकल्पिक आवास न होने का तर्क भी दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि तहसीलदार ने दोबारा स्थलीय निरीक्षण कराया और उपलब्ध अभिलेखों व साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय लिया। आदेश में कहा गया कि सार्वजनिक उपयोग की सुरक्षित श्रेणी की भूमि पर किसी भी व्यक्ति को निजी अधिकार नहीं दिया जा सकता। शासन की पुनर्वास नीति के तहत रियाज अहमद को पहले ही आवासीय भूमि का पट्टा मिल चुका है। इस कब्जे का कोई वैधानिक आधार नहीं पाया गया है।
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तहसीलदार विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि अवैध निर्माण हटाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। नायब तहसीलदार शेखर शुक्ला के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस की एक संयुक्त टीम गठित की गई है। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी।